ढह गया ₹10 करोड़ का पुल, अखिलेश यादव बोले – “भाजपा का भ्रष्टाचार भरभरा कर गिर रहा है”
चित्रकूट (उत्तर प्रदेश) | 16 जुलाई 2025
चित्रकूट जिले में उस समय हड़कंप मच गया जब ₹10 करोड़ की लागत से बना एक नया पुल उद्घाटन से पहले ही ध्वस्त हो गया। भारी बारिश के बाद पुल का एप्रोच हिस्सा भरभराकर गिर गया, जिससे क्षेत्र में आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई। इस घटना पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला और इसे “भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण” करार दिया।
📍 हादसे की पूरी जानकारी
यह पुल भौंरी–बघवारा मार्ग पर निर्माणाधीन था और कुछ ही दिनों में इसका लोकार्पण प्रस्तावित था।
अचानक आई बारिश के चलते एप्रोच रोड धंस गया और पुल का एक सिरा बैठ गया।
पुल से जुड़ी सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं और ग्रामीण इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया।
स्थानीय प्रशासन और सेतु निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और तुरंत मरम्मत कार्य शुरू कर दिया।
🗣️ अखिलेश यादव का भाजपा पर निशाना
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस हादसे को लेकर ट्विटर पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने लिखा:
“भाजपा राज में 10 करोड़ की लागत से बना चित्रकूट का पुल उद्घाटन से पहले ही गिर गया। कभी टंकी, कभी पुल… भाजपा का भ्रष्टाचार अब भरभरा कर गिर रहा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में सरकारी निर्माण अब “कागज़ी गुणवत्ता” के भरोसे चल रहे हैं, जिससे लोगों की जान और संसाधन दोनों खतरे में हैं।
🛠️ प्रशासन की कार्रवाई
प्रशासन ने पुल पर यातायात पूर्ण रूप से रोक दिया है।
ठेकेदार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
लोक निर्माण विभाग (PWD) और सेतु निगम के अभियंताओं की टीम घटनास्थल पर तैनात है।
निर्माण एजेंसी द्वारा जल्द से जल्द पुनर्निर्माण का आश्वासन दिया गया है।
📊 पुल हादसे से जुड़े मुख्य बिंदु
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| स्थान | भौंरी–बघवारा मार्ग, चित्रकूट |
| लागत | ₹10 करोड़ |
| स्थिति | उद्घाटन से पहले एप्रोच रोड धंसा, पुल का एक सिरा गिरा |
| कारण | भारी बारिश + निर्माण गुणवत्ता पर सवाल |
| राजनीतिक प्रतिक्रिया | अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा हमला |
| प्रशासनिक जवाब | मरम्मत कार्य शुरू, ठेकेदार से जवाब-तलब |
🔎 क्या कहता है बड़ा सवाल?
यह कोई पहली घटना नहीं है। बीते महीनों में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां पुल, पानी की टंकी या सड़कें पहली बारिश में ही ढह गईं। यह स्थिति न सिर्फ सरकारी पैसे की बर्बादी, बल्कि जनहित और विश्वास की क्षति भी दर्शाती है।

