बिहार वोटर लिस्ट विवाद: तेजस्वी यादव का चुनाव आयोग पर तीखा हमला, विदेशी नामों को बताया साजिश!
पटना, 14 जुलाई 2025 – बिहार में मतदाता सूची (Voter List) को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है। राज्य की मतदाता सूची में विदेशी नागरिकों — खासकर नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार — के नाम दर्ज होने की खबरों पर राजद नेता तेजस्वी यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सब “बीजेपी की चाल है” और चुनाव आयोग अब “स्वतंत्र संस्था नहीं, एक पार्टी की सेल बन चुका है।”
🔥 क्या बोले तेजस्वी यादव?
तेजस्वी ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“सूत्रों से मिली जानकारी कह रहे हैं कि नेपाल और बांग्लादेश के नाम वोटर लिस्ट में हैं। हम कहते हैं कि ये ‘सूत्र’ नहीं ‘मूत्र’ हैं। ये वहीं सूत्र हैं जो कहते थे कि पाकिस्तान से टेररिस्ट आ रहे हैं।”
उन्होंने इस मुद्दे को बिहारियों के वोट छीनने की साजिश करार दिया और कहा कि “गरीबों, मजदूरों, पिछड़े वर्गों और दलितों के वोटर कार्ड जानबूझकर हटाए जा रहे हैं।”
📊 क्या है मामला?
बिहार में Special Intensive Revision (SIR) के तहत डोर-टू-डोर वेरिफिकेशन चल रहा है।
इस दौरान कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार आदि के नागरिकों के नाम भी वोटर लिस्ट में पाए गए हैं।
आयोग के अधिकारियों का कहना है कि यह प्रारंभिक सत्यापन है और अंतिम सूची में संशोधन किया जाएगा।
⚖️ चुनाव आयोग की सफाई
चुनाव आयोग ने कहा है कि यह वेरिफिकेशन प्रक्रिया का हिस्सा है और किसी भी ग़लत प्रविष्टि को हटाया जाएगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि:
यह प्रक्रिया 30 सितंबर 2025 तक पूरी की जाएगी।
किसी विदेशी नागरिक का नाम अंतिम वोटर लिस्ट में नहीं रहने दिया जाएगा।
मतदाताओं को अपना सत्यापन कराने के लिए फॉर्म भरने का अवसर मिलेगा।
🧠 विपक्ष का आरोप
कांग्रेस, CPI(ML), JDU और AAP समेत कई विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया “नकली बहाने से असली वोटरों को हटाने की कोशिश है”।
📌 निष्कर्ष
बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह विवाद राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन चुका है। जहां एक ओर चुनाव आयोग पारदर्शिता और शुद्धता की बात कर रहा है, वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा है।

