दिल्ली के सीलमपुर में चार मंजिला इमारत ढही: 8 लोग रेस्क्यू, कई अब भी मलबे में दबे होने की आशंका
नई दिल्ली, 12 जुलाई 2025 – राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सीलमपुर स्थित जनता मजदूर कॉलोनी में शनिवार सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया। सुबह करीब 7 बजे एक चार मंजिला पुरानी इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। अब तक 8 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, लेकिन अभी भी कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।
🧱 हादसा कैसे हुआ?
घटना गली नंबर 5 में हुई, जहां एक जर्जर इमारत अचानक ढह गई। इमारत के गिरते ही इलाके में चीख-पुकार मच गई और आसपास के लोग मदद के लिए दौड़ पड़े। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि इमारत में संरचनात्मक कमजोरी और बारिश के कारण जमा पानी ढहने की बड़ी वजह हो सकती है।
🚨 रेस्क्यू ऑपरेशन तेज़ी से जारी
दिल्ली दमकल विभाग की 7 से अधिक गाड़ियाँ तुरंत मौके पर भेजी गईं।
दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ, और सिविल डिफेंस की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं।
मलबे से बाहर निकाले गए 8 लोगों में एक 14 महीने का बच्चा भी शामिल है।
सभी घायलों को JPC और GTB अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
स्थानीय निवासी भी राहत कार्यों में बढ़-चढ़कर मदद कर रहे हैं।
👥 स्थानीय स्थिति और चुनौतियाँ
हादसा भीड़भाड़ और संकरी गलियों वाले इलाके में हुआ है, जिससे बचाव कार्य में कई मुश्किलें आ रही हैं।
प्रशासन ने आसपास के भवनों को अस्थायी रूप से खाली करा दिया है ताकि किसी और दुर्घटना से बचा जा सके।
इमारत के गिरने से आसपास की बिजली और गैस लाइनों को नुकसान पहुंचा है, जिसे दुरुस्त किया जा रहा है।
⚠️ सुरक्षा और निगरानी पर सवाल
यह घटना महज़ एक इत्तेफ़ाक नहीं है — पिछले 24 घंटों में यह दिल्ली में इमारत ढहने की दूसरी घटना है। इससे पहले आज़ाद मार्केट के पास एक तीन मंजिला इमारत गिर गई थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।
यह गंभीर सवाल उठाता है कि:
क्या जर्जर भवनों की स्ट्रक्चरल ऑडिट समय पर हो रही है?
क्या निगम द्वारा दी गई निर्माण स्वीकृतियाँ और निरीक्षण पर्याप्त हैं?
क्या बारिश के पहले सभी संवेदनशील इलाकों की पूर्व-तैयारी और निरीक्षण किया गया?
✅ अब क्या जरूरी है?
पुरानी और जर्जर इमारतों की तत्काल ऑडिट की जानी चाहिए।
स्थानीय निवासियों को जागरूक किया जाए कि वे किसी भी दरार या कमज़ोरी की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
निगम को चाहिए कि मानसून से पहले हर संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा परीक्षण करवाए और रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
🔍 निष्कर्ष
सीलमपुर में हुआ यह हादसा महज़ एक इमारत का गिरना नहीं है, बल्कि यह शहर की अव्यवस्थित और उपेक्षित शहरी नियोजन व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल है। राहत और बचाव कार्यों में सभी एजेंसियाँ सराहनीय भूमिका निभा रही हैं, लेकिन स्थायी समाधान तब ही संभव है जब जमीनी स्तर पर नियोजन, निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत किया जाए।

