हिमाचल प्रदेश बादल फट त्रासदी: मंडी जिले में मौत का आंकड़ा 16 पहुंचा, 55 अब भी लापता
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और बादल फट की तबाही थमने का नाम नहीं ले रही है। मंडी जिले के थुनाग क्षेत्र में शुक्रवार को एक और शव मिलने के बाद मौत का कुल आंकड़ा 16 तक पहुंच गया है। वहीं, 55 लोग अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में स्थानीय प्रशासन, एनडीआरएफ और सेना की टीमें जुटी हुई हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने मंडी के अलावा कुल्लू, चंबा और शिमला जैसे जिलों में भी भारी तबाही मचाई है।
🌧️ क्या हुआ थुनाग में?
थुनाग तहसील के दुर्गम गांवों में लगातार बारिश के चलते कई घर, सड़कें और पुल बह गए हैं। गुरुवार रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर आ गए और थुनाग क्षेत्र के कई घर मलबे में दब गए। मलबे से आज सुबह एक और शव बरामद किया गया, जिसकी पहचान एक स्थानीय युवक के रूप में हुई है।
🚨 रेस्क्यू ऑपरेशन और चुनौतियाँ
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों के साथ सेना भी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी है। पहाड़ी इलाकों में रास्ते टूटने और संचार व्यवस्था ठप होने के कारण राहत और बचाव कार्यों में भारी दिक्कतें आ रही हैं। हेलीकॉप्टर की मदद से दूरस्थ क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। अब तक 500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा चुका है।
🏚️ नुकसान का आकलन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मंडी जिले में 60 से अधिक घर पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं और सैकड़ों एकड़ खेती योग्य भूमि नष्ट हो गई है। बिजली और पानी की आपूर्ति भी कई क्षेत्रों में बाधित है। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित परिवारों के लिए राहत शिविर और भोजन वितरण केंद्र स्थापित किए हैं।
🗣️ मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मंडी जिले का हवाई सर्वेक्षण किया और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया। उन्होंने केंद्र सरकार से विशेष पैकेज की मांग की है।
🔔 निष्कर्ष:
बादल फट की यह भयावह घटना एक बार फिर जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन की गंभीर चेतावनी है। हिमाचल जैसे संवेदनशील पहाड़ी राज्यों में ऐसी आपदाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है।

