हिसार: YouTuber ज्योति मल्होत्रा की न्यायिक हिरासत बढ़ी, वकील जल्द दाखिल करेंगे जमानत याचिका
हिसार | विशेष संवाददाता
सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर और YouTuber ज्योति मल्होत्रा की न्यायिक हिरासत को दो सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। हिसार की अदालत में सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई हुई, जिसमें अदालत ने पुलिस की मांग पर हिरासत बढ़ाने की अनुमति दे दी।
ज्योति मल्होत्रा को मई 2025 में गोपनीय जानकारी लीक करने और संदिग्ध विदेशी संपर्कों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें पहले पुलिस रिमांड, फिर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अब उनकी जमानत याचिका एक बार फिर खारिज होने के बाद उनके वकील ने सत्र न्यायालय में याचिका दाखिल करने की तैयारी कर ली है।
🔍 क्या हैं आरोप?
गंभीर धाराएं: ज्योति पर Official Secrets Act, Bharatiya Nyaya Sanhita, और आईटी अधिनियम की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
पाकिस्तानी लिंक: पुलिस का दावा है कि वे पाकिस्तान स्थित संदिग्ध सोशल मीडिया हैंडल्स से संपर्क में थीं।
डिजिटल जांच: उनके लैपटॉप और मोबाइल से 13 टेराबाइट से अधिक डेटा जब्त किया गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या उन्होंने सीमा क्षेत्रों से कोई संवेदनशील जानकारी साझा की है।
बैंक जांच: पुलिस ने चार बैंक खातों की जानकारी भी तलब की है, जिनमें संदिग्ध लेनदेन की जांच चल रही है।
🧑⚖️ अदालत का रुख
पहले भी ज्योति की बेल याचिका खारिज हो चुकी है।
न्यायिक हिरासत की अवधि बढ़ाकर अब अगली सुनवाई 7 जुलाई 2025 को तय की गई है।
अदालत का कहना है कि जांच अभी जारी है, इसलिए फिलहाल बेल देना उचित नहीं।
📣 वकील का पक्ष
ज्योति के वकील कुमार मुखेश ने कहा,
“हम जल्द ही जिला सत्र न्यायालय में जमानत याचिका दाखिल करेंगे। अभी तक कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है जो यह साबित कर सके कि उन्होंने कोई राष्ट्रविरोधी कार्य किया हो।”
⚠️ अब आगे क्या?
जमानत याचिका पर सुनवाई अगले सप्ताह सत्र न्यायालय में होगी।
पुलिस बॉर्डर एरिया में शूट की गई वीडियो लोकेशन, मोबाइल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल कम्युनिकेशन की गहराई से जांच कर रही है।
📌 निष्कर्ष
ज्योति मल्होत्रा केस देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है, खासकर सोशल मीडिया पर। अभी तक जांच में कोई प्रत्यक्ष रूप से खुफिया जानकारी लीक होने का प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन जांच एजेंसियों की सतर्कता और डिजिटल एविडेंस की जांच के चलते उन्हें फिलहाल राहत नहीं मिली है।

