कांवड़ यात्रा 2025: आस्था की राह या राजनीति का अखाड़ा?
नई दिल्ली | 3 जुलाई 2025 —
कांवड़ यात्रा 2025 की शुरुआत के साथ ही एक बार फिर सियासी घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और समाजवादी पार्टी के सांसद एस.टी. हसन के विवादित बयानों के बाद भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इस बार मामला सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया है।
🔴 क्या कहा विपक्ष ने?
दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांवड़ यात्रा अब धार्मिक से अधिक राजनीतिक बन चुकी है और इसका उपयोग ध्रुवीकरण के लिए हो रहा है।
वहीं, एस.टी. हसन ने तीर्थ यात्रा मार्ग पर धर्म के आधार पर पूछताछ को “धार्मिक आतंकवाद” की संज्ञा दी।
🔵 भाजपा का तीखा पलटवार
भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इन बयानों को “हिंदू विरोधी मानसिकता” करार दिया। उन्होंने कहा कि:
“जो लोग ‘डिस्मैंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ जैसे आयोजनों का हिस्सा रहे हैं, उन्हें भारत की आस्थाओं से समस्या है।”
🔱 विहिप की चेतावनी
विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने चेतावनी दी है कि:
“कांवड़ यात्रा राष्ट्र की एकता का प्रतीक है, इसमें किसी भी प्रकार की बाधा या अपमान सहन नहीं किया जाएगा।”
🧭 निष्कर्ष
हर साल लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा में हिस्सा लेते हैं। लेकिन इस बार यह यात्रा राजनीति, धर्म और आस्था के बीच खींची गई रेखाओं का नया प्रतीक बन गई है।
जहां भाजपा इसे “आस्था और भारतीय संस्कृति का उत्सव” मानती है, वहीं विपक्ष इसे “ध्रुवीकरण का साधन” बता रहा है।
📌 आप क्या सोचते हैं?
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