विश्व शांति सम्मेलन में मास्टरजी का संदेश: “आंतरिक शांति से ही संभव है वैश्विक शांति”
लेह, 21 अगस्त 2025 — लेह, लद्दाख में आयोजित विश्व शांति सम्मेलन में एक प्रभावशाली रैली का आयोजन किया गया, जो हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम हमलों की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में थी। इस आयोजन को महाबोधि इंटरनेशनल मेडिटेशन सेंटर, कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज और GPF इंडिया ने मिलकर आयोजित किया।
इस रैली का प्रमुख आकर्षण थे मास्टरजी, जिन्हें आंतरिक शांति और जीवन की सच्ची दिशा पर अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया था। उन्होंने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा,
“बाहरी युद्धों को समाप्त करने के लिए, पहले हमें अपने भीतर के संघर्षों को खत्म करना होगा।”
क्या कहा मास्टरजी ने?
अपने संबोधन में मास्टरजी ने प्रेम, करुणा और एकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि हम सभी जीव एक ही चेतना का हिस्सा हैं और जब तक हम सभी जीवों के प्रति दया और प्रेम नहीं अपनाते, तब तक सच्ची शांति संभव नहीं।
उन्होंने जीवन को “एक खेल” की तरह बताया, जिसमें हर व्यक्ति को अपनी भूमिका बिना आसक्ति के निभानी चाहिए। यही तरीका है स्थायी आनंद की ओर बढ़ने का।
प्रमुख अतिथि और संदेश
इस आयोजन में वंदनीय भिक्खु संघसेना, डॉ. मार्केंडे, डॉ. पीआर त्रिवेदी, प्रो. सुज़ैन वॉन डेर होंडे जैसे कई प्रतिष्ठित व्यक्ति उपस्थित थे। लेह बाजार तक निकाली गई शांति रैली के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया कि शांति की शुरुआत हमारे भीतर से ही होती है।
आत्मबोध की यात्रा
मास्टरजी ने बताया कि उन्होंने 2007 में आत्मबोध प्राप्त किया और पिछले 16 वर्षों में लाखों लोगों को व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने यह साझा किया कि हर इंसान के भीतर शांति का स्रोत मौजूद है — जरूरत है उसे पहचानने की।
निष्कर्ष:
यह सम्मेलन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शांति की ओर एक सामूहिक कदम था। मास्टरजी का संदेश आज के दौर में अत्यंत प्रासंगिक है, जहाँ आंतरिक शांति ही बाहरी समाधान की कुंजी बन सकती है।

