बिहार की सच्चाई पर प्रशांत किशोर का बड़ा बयान: “यहां के लोग मजबूरी में पलायन कर रहे हैं”
प्रशांत किशोर, जो कभी राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में देश की बड़ी सियासी पार्टियों के लिए रणनीति बनाते थे, अब बिहार की जमीनी सच्चाई को उजागर करने के लिए सीधे जनता से संवाद कर रहे हैं। अपनी जन-संवाद यात्रा के दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने बिहार की बदहाल स्थिति को लेकर एक बेहद तीखा बयान दिया:
“बिहार की स्थिति किसी से छिपी नहीं है, यहां लोग रोजगार और अवसरों की तलाश में मजबूरी में पलायन कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि बिहार जैसे राज्य, जो ऐतिहासिक रूप से ज्ञान, संस्कृति और राजनीतिक नेतृत्व का केंद्र रहा है, आज देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता है।
“यह विडंबना है कि जहां कभी चाणक्य और चंद्रगुप्त जैसे महान विचारक और शासक हुए, आज उसी बिहार का युवा दिल्ली, पंजाब, मुंबई या गुजरात में मजदूरी करने को मजबूर है,” प्रशांत किशोर ने कहा।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिहार की सरकारें सिर्फ घोषणाएं करती रही हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत नहीं बदली। स्वास्थ्य, शिक्षा, और उद्योग के नाम पर केवल कागज़ी योजनाएं बनीं, जबकि हकीकत में गांवों की सड़कें टूटी हैं, स्कूलों में शिक्षक नहीं और अस्पतालों में डॉक्टर नहीं।
प्रशांत किशोर ने बिहार के युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे अपने अधिकारों को पहचानें और सिर्फ वोट देकर काम न मानें, बल्कि सरकार से जवाब भी मांगें। उन्होंने कहा कि यदि जनता जागरूक नहीं हुई, तो अगली पीढ़ी भी ऐसे ही पलायन के लिए मजबूर होगी।
उन्होंने अपने मिशन ‘जन सुराज’ को बिहार में असली विकास और पारदर्शिता की शुरुआत बताते हुए कहा कि यह कोई चुनावी अभियान नहीं, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया है।
निष्कर्ष में, प्रशांत किशोर का यह बयान सिर्फ बिहार की विफलताओं की तरफ इशारा नहीं करता, बल्कि यह उस गहरे दर्द को भी दिखाता है, जो वर्षों से यहां के आम नागरिक झेलते आ रहे हैं। यह वक्त है कि शासन की जवाबदेही तय हो और विकास केवल वादों में नहीं, ज़मीन पर नजर आए।

