SEBI ने MCX पर लगाया ₹25 लाख का जुर्माना: सॉफ्टवेयर सेवा भुगतानों के खुलासे में चूक
मुंबई, 27 मई 2025 — बाजार विनियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (MCX) पर ₹25 लाख का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई सॉफ्टवेयर सेवा भुगतानों में पर्याप्त खुलासे न करने के कारण की गई है।
क्या है मामला?
MCX ने 63 मून्स टेक्नोलॉजिज लिमिटेड (पूर्व में फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज इंडिया लिमिटेड) के साथ एक सॉफ्टवेयर अनुबंध किया था। SEBI के अनुसार, अक्टूबर 2022 से जून 2023 तक MCX ने इस कंपनी को ₹222 करोड़ का भुगतान किया। यह राशि कंपनी के FY22 के लाभ से लगभग दो गुना अधिक थी। इसके बावजूद, इन भुगतानों का खुलासा जनवरी 2023 में जाकर किया गया, जो नियामकीय मानकों का उल्लंघन है।
SEBI की कार्रवाई
SEBI ने MCX को 45 दिनों के भीतर जुर्माना भरने का निर्देश दिया है। नियामक के अनुसार, MCX ने इन महत्वपूर्ण भुगतानों के बारे में समय पर और पारदर्शी जानकारी नहीं दी, जिससे निवेशकों और अन्य हितधारकों को संभावित रूप से भ्रामक जानकारी मिली।
63 मून्स टेक्नोलॉजिज के साथ पुराना रिश्ता
MCX और 63 मून्स के बीच यह अनुबंध साल 2003 में हुआ था, जब 63 मून्स MCX की प्रमोटर कंपनी थी। बाद में, 2020 में MCX ने नया ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म बनाने के लिए TCS से करार किया, लेकिन तकनीकी अड़चनों के कारण वह मंच समय पर लॉन्च नहीं हो सका। नतीजतन, MCX को 63 मून्स से सेवाएं महंगे दामों पर जारी रखनी पड़ीं।
SEBI का मकसद: पारदर्शिता और निवेशकों की सुरक्षा
SEBI ने अपने आदेश में यह भी कहा कि भारतीय पूंजी बाजार में पारदर्शिता बनाए रखना और निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसका प्राथमिक उद्देश्य है। इसलिए समय पर और पूर्ण खुलासे न करने को गंभीरता से लिया गया है।
🔍 मुख्य बिंदु:
जुर्माना राशि: ₹25 लाख
विवादित भुगतान: ₹222 करोड़ (FY22 लाभ से अधिक)
संबंधित अवधि: अक्टूबर 2022 – जून 2023
खुलासा कब किया गया: जनवरी 2023
भुगतान किसे किया गया: 63 मून्स टेक्नोलॉजिज
नोट: SEBI (सेबी) की स्थापना वर्ष 1988 में की गई थी और इसे 1992 में संवैधानिक शक्तियां प्राप्त हुईं। यह संस्था भारत में पूंजी बाजार की निगरानी और नियमन करती है।

