कटघोरा में “कटघोरा के राजा” का भव्य स्वागत: आस्था और संस्कृति का संगम
कटघोरा, कोरबा (छत्तीसगढ़), अगस्त 2025 — गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर कटघोरा शहर में “कटघोरा के राजा” नामक विशाल गणेश प्रतिमा का भव्य आगमन हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन ने पूरे क्षेत्र को आस्था, रंग और उत्साह के रंगों से भर दिया। शोभायात्रा से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक, हर पहलु ने लोगों को भावविभोर कर दिया।
🎉 समारोह की खास बातें
इस बार 21 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा को पुणे के दगडू सेठ हलवाई मंदिर की शैली में तैयार किया गया। इस प्रतिमा को विशेष रूप से राजनांदगांव से कटघोरा लाया गया, जिसे देखने के लिए हजारों लोग उमड़ पड़े।
शोभायात्रा के दौरान, ढोल-धुमाल, स्केटिंग रंगोली और पुष्प वर्षा ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया। बच्चे, युवा और बुजुर्ग – सभी इस उत्सव में पूरे मन से शामिल हुए।
👥 जनसमर्थन और प्रशासन की भागीदारी
इस कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए, जिनमें स्थानीय निवासी और बाहर से आए भक्तों की भी बड़ी संख्या रही।
कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल समेत कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। उन्होंने प्रतिमा के दर्शन किए और आयोजन समिति की सराहना की।
📿 सिर्फ धार्मिक नहीं, सांस्कृतिक भी
“कटघोरा के राजा” का आगमन सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहा। यह आयोजन स्थानीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर उभरा।
इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत कितनी समृद्ध और जीवंत है।
📌 संक्षेप में
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| मूर्ति की ऊंचाई | 21 फीट, दगडू सेठ हलवाई मंदिर की शैली में |
| मुख्य आकर्षण | धुमाल, स्केटिंग रंगोली, पुष्प वर्षा, शोभायात्रा |
| भागीदारी | हजारों श्रद्धालु, विधायक और अधिकारी |
| आयोजन का उद्देश्य | धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक एकता का प्रदर्शन |
🔚 निष्कर्ष
“कटघोरा के राजा” का यह आयोजन सिर्फ एक पर्व नहीं बल्कि लोगों की आस्था, संस्कार और संस्कृति का उत्सव बन गया है। यह हमें यह भी सिखाता है कि जब समाज एक साथ आता है, तो परंपराएं और पहचान और मजबूत होती हैं।

