भारत में मलेरिया के मामलों में 97% की कमी दर्ज की गई है। आयुष्मान भारत और मिशन इंद्रधनुष जैसी स्वास्थ्य योजनाओं के कारण बीमारी नियंत्रण में बड़ा सुधार। पढ़ें पूरी रिपोर्ट…
नई दिल्ली: भारत में मलेरिया के मामलों में अभूतपूर्व कमी दर्ज की गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और सरकार की प्रमुख योजनाओं की सफलता के कारण देश ने इस जानलेवा बीमारी के नियंत्रण में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। विशेषज्ञों के अनुसार, मलेरिया के मामलों में लगभग 97 प्रतिशत की गिरावट ने स्वास्थ्य क्षेत्र में देश की उपलब्धियों को और भी मजबूती दी है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भारत मलेरिया उन्मूलन की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है और अगर यह रफ्तार जारी रहती है तो देश 2030 तक मलेरिया‑मुक्त राष्ट्र बन सकता है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में आयोजित All India Medical Conference – IMA NATCON 2025 में यह जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस सफलता के पीछे आयुष्मान भारत, मिशन इंद्रधनुष और अन्य स्वास्थ्य पहलों का महत्वपूर्ण योगदान है। इन योजनाओं के माध्यम से लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, रोग‑निगरानी, समय पर इलाज और जागरूकता अभियान पहुंचाए गए, जिससे मलेरिया के संक्रमण और प्रसार पर काफी हद तक काबू पाया गया।
मलेरिया, जो कि मच्छर जनित रोग है, दशकों तक भारत के लिए गंभीर स्वास्थ्य चुनौती रहा है। स्वतंत्रता के बाद से लेकर हाल तक लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित होते रहे और हजारों की मौतें होती रही। लेकिन निरंतर स्वास्थ्य प्रयासों, बेहतर उपचार और रोग‑निगरानी के कारण अब स्थिति में भारी सुधार देखने को मिल रहा है। WHO की रिपोर्ट और भारत के स्वास्थ्य आंकड़े भी इस प्रगति की पुष्टि करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में मलेरिया के मामलों में लगातार गिरावट दर्ज हुई है। कई राज्यों में विशेष उपायों और योजनाओं के तहत स्थानीय समुदायों को मच्छरदानी, स्वास्थ्य शिविर और निगरानी कार्यक्रम उपलब्ध कराए गए। तेलंगाना, ओडिशा और गुजरात जैसे राज्य इस दिशा में उदाहरण पेश कर रहे हैं, जहां अब कई जिलों में मलेरिया के मामलों में लगभग शून्य की स्थिति आ गई है। इसके साथ ही देश में डेंगू जैसी अन्य मच्छरजनित बीमारियों से होने वाली मौतों में भी कमी आई है और मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि पिछले सालों में मलेरिया से होने वाली मौतें न्यूनतम स्तर पर आ गई हैं और मलेरिया के नियंत्रण की दिशा में देश ने WHO की High Burden to High Impact (HBHI) सूची से बाहर निकलने का ऐतिहासिक कदम भी उठाया है। यह साबित करता है कि बीमारी का बोझ अब सीमित क्षेत्रों तक सिमट चुका है और पूरे देश में इसके प्रसार पर बेहतर नियंत्रण है।
सरकारी अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि मलेरिया के मामलों में इस 97% की गिरावट से यह स्पष्ट होता है कि स्वास्थ्य नीतियां और जागरूकता अभियान निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि देश इसी तरह निरंतर प्रयास करता रहा, तो 2030 तक भारत मलेरिया‑मुक्त राष्ट्र बन सकता है।
इस उपलब्धि ने यह संदेश भी दिया है कि गंभीर बीमारियों के नियंत्रण में निगरानी, समय पर इलाज और समुदाय आधारित जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं। इसके साथ ही यह स्वास्थ्य क्षेत्र में नीति निर्माण और कार्यान्वयन की सफलता को भी दर्शाता है।
भारत सरकार की यह प्रगति देश के लिए गर्व का विषय है और इसे अन्य देशों के लिए भी प्रेरक मॉडल माना जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मलेरिया नियंत्रण और उन्मूलन के लिए लगातार निगरानी, वैक्सीनेशन और उपचार के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम जारी रखना जरूरी है।
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