कलेक्टर की बैठक में थीं CMO, गीदम में उनके नाम से बन गया प्रस्ताव
गीदम। नगर पंचायत गीदम में सरकारी दस्तावेजों में कथित हेरफेर और फर्जी हस्ताक्षर के आरोप ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौ पालक संघ के जिलाध्यक्ष एवं वरिष्ठ निवासी दिनेश शर्मा ने थाना गीदम में शिकायत देकर नगर पंचायत अध्यक्ष, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, लिपिक और संबंधित पार्षदों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 16 जून 2026 को सुबह करीब 11:30 बजे नगर पंचायत गीदम में विशेष बैठक होना दर्शाया गया, जबकि उसी समय मुख्य नगर पालिका अधिकारी एच. प्रधान दंतेवाड़ा में कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित टीएल बैठक में मौजूद थीं।
एक ही समय में दो जगह मौजूदगी का दावा!
शिकायतकर्ता का आरोप है कि नगर पंचायत की कार्यवाही पंजी में CMO के नाम से प्रस्ताव दर्ज किया गया और उसे परिषद के समक्ष प्रस्तुत एवं पारित बताया गया। यही मामला अब पूरे विवाद का केंद्र बन गया है।
दिनेश शर्मा का दावा है कि CMO की कथित ध्वनि रिकॉर्डिंग भी सामने आई है, जिसमें उनके बैठक में मौजूद नहीं होने की बात कही गई है। इसके आधार पर शिकायतकर्ता ने कार्यवाही पंजी और उसमें किए गए हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है।
क्या सरकारी रजिस्टर में हुआ ‘खेल’?
शिकायत में कुछ पार्षदों के हस्ताक्षरों पर भी संदेह जताया गया है। आरोप है कि कार्यवाही पंजी में दर्ज हस्ताक्षर वास्तविक हैं या नहीं, इसकी जांच हस्तलेख विशेषज्ञ से कराई जानी चाहिए।
अगर जांच में दस्तावेज और हस्ताक्षर फर्जी पाए जाते हैं, तो मामला महज नगर पंचायत की बैठक का विवाद नहीं रहेगा, बल्कि शासकीय अभिलेखों की कथित कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र का गंभीर मामला बन सकता है।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा सवाल
शिकायतकर्ता ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है। साथ ही कथित कार्यवाही रजिस्टर, ध्वनि रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेज जब्त कर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
अब सवाल गीदम पुलिस से है—
क्या कार्यवाही पंजी की जांच होगी?
क्या हस्ताक्षरों का फोरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा?
क्या उस दिन की कलेक्टर बैठक के रिकॉर्ड से CMO की मौजूदगी की पुष्टि होगी?
और सबसे बड़ा सवाल—अगर सरकारी दस्तावेज में वाकई फर्जीवाड़ा हुआ है, तो जिम्मेदार कौन है?
दिनेश शर्मा ने चेतावनी दी है कि शिकायत पर कार्रवाई में देरी हुई तो वे उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
फिलहाल आरोप गंभीर हैं, दस्तावेज जांच के घेरे में हैं और अब कार्रवाई की गेंद पुलिस के पाले में है। गीदम नगर पंचायत के कथित ‘फर्जी दस्तखत कांड’ में सच क्या है, इसका फैसला निष्पक्ष जांच के बाद ही होगा।

