महिलाओं पर अभद्र टिप्पणी कर बुरे फंसे अनिरुद्धाचार्य, महिला वकील पहुंचीं कोर्ट—मुकदमा दर्ज करने की मांग
वृंदावन (मथुरा), 8 अगस्त 2025:
प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज (पुकी बाबा) इस समय विवादों में घिर चुके हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में उन्होंने अविवाहित महिलाओं पर आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी की, जिसके बाद देशभर में विरोध की लहर दौड़ गई। अब इस बयान को लेकर महिला अधिवक्ताओं ने उनके खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने की पहल शुरू कर दी है।
🧑⚖️ मीरा पहुंचीं कोर्ट, महिला वकीलों ने दी आपराधिक शिकायत
मथुरा की अधिवक्ता प्रियदर्शिनी मिश्रा और उनकी सहयोगी मीरा ने मथुरा सिविल कोर्ट पहुंचकर अनिरुद्धाचार्य के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की याचिका दायर की। उनका कहना है कि कथावाचक की यह टिप्पणी न केवल महिलाओं का अपमान है बल्कि यह समाज में महिलाओं के प्रति द्वेष और असम्मान को बढ़ावा देती है।
“यह कोई साधारण बात नहीं है। मंच से इस तरह महिलाओं के बारे में बोलना, वह भी धार्मिक प्रवचन के नाम पर—पूरी तरह आपराधिक है।”
— मीरा, अधिवक्ता
📹 वायरल वीडियो में क्या कहा गया था?
वायरल क्लिप में अनिरुद्धाचार्य को कहते सुना गया:
“25 साल की लड़की अगर शादी नहीं करती, तो वह समाज में बोझ बन जाती है…“
इस कथन को लेकर महिलाओं ने गहरा विरोध जताया है। कई सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे स्त्री-द्वेषपूर्ण और मानसिक शोषण की श्रेणी में रखा है।
🔥 सोशल मीडिया पर भारी विरोध
अनिरुद्धाचार्य के इस बयान के खिलाफ सोशल मीडिया पर गुस्से की लहर फैल गई। ट्विटर (अब X), इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर #ArrestAniruddhacharya, #PukiBabaControversy जैसे ट्रेंड चलने लगे।
बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पाटनी की बहन, खुशबू पाटनी ने भी इस बयान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “एंटी-वुमन और समाज के लिए ज़हरीला” बताया।
🙏 आश्रम की सफाई और बाबा की माफी
विवाद बढ़ने पर गौरा गोपाल आश्रम के मीडिया प्रभारी ने सफाई दी कि बाबा की टिप्पणी को गलत संदर्भ में पेश किया गया। अनिरुद्धाचार्य ने भी एक वीडियो जारी कर कहा:
“मैं महिलाओं का अपमान नहीं कर सकता। अगर मेरी बातों से किसी को ठेस पहुंची है, तो मैं क्षमा चाहता हूं।”
हालांकि, महिला संगठनों का कहना है कि माफ़ी काफ़ी नहीं, और ऐसे लोगों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना चाहिए।
⚖️ कानूनी दृष्टिकोण
महिला वकीलों द्वारा दर्ज की गई याचिका में भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराओं का हवाला दिया गया है, जिनमें शामिल हैं:
धारा 354A: यौन उत्पीड़न
धारा 509: किसी महिला की मर्यादा का अपमान
आईटी अधिनियम: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री का प्रचार
📌 निष्कर्ष
अनिरुद्धाचार्य महाराज पर लगा यह आरोप केवल एक धार्मिक व्यक्ति के कथन का विवाद नहीं है, बल्कि यह मुद्दा समाज में महिलाओं की गरिमा, उनकी स्वतंत्रता और धार्मिक मंचों की ज़िम्मेदारी से जुड़ा हुआ है। अब देखना यह है कि अदालत इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या कथावाचकों के लिए जवाबदेही का नया मानदंड स्थापित होता है।

