चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए हर महीने पेंशन ले रही महिलाओं को बड़ी राहत दी है। सरकार ने तीसरे और चौथे स्टेज के कैंसर, हीमोफिलिया, थैलेसीमिया और स्किल सेल एनीमिया से पीड़ित गरीब महिलाओं को भी ‘दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना’ का लाभ देने का एलान किया है।
हर महीने दिए जाएंगे ₹2100
जानकारी के अनुसार, गंभीर बीमारी से इलाज के लिए जहां हर महीने 3200 रुपये दिए जाते थे, वहीं लाडो लक्ष्मी योजना के तहत भी हर महीने 2100 रुपये और दिए जाएंगे। इसमें से 1100 रुपये बचत बैंक खाते में डाले जाएंगे, जबकि शेष 1000 रुपये सावधि बैंक खाते (आरडी) में जमा किए जाएंगे।
संशोधित अधिसूचना जारी
सामाजिक न्याय, सशक्तीकरण एवं अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं अंत्योदय (सेवा) विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. जी अनुपमा ने संशोधित लाडो लक्ष्मी योजना की अधिसूचना जारी कर दी है। सावधि खाता अधिकतम पांच साल के लिए संचालित किया जाएगा। प्रदेश सरकार चाहे तो इससे कम अवधि भी निर्धारित कर सकती है।
जानें क्या रहेगी योग्यता?
इस योजना के तहत 1500 रुपये या उससे कम की राशि प्रति माह प्राप्त करने का विकल्प चुनने वाले लाभार्थियों को बचत बैंक खाते में 500 रुपये और आवर्ती जमा योजना में 1000 रुपये जमा किए जाएंगे। यह राशि उन्हें परिपक्वता (maturity) पर ब्याज सहित दी जाएगी।
वहीं, एक लाख 80 हजार रुपये तक सालाना आय वाले परिवारों की वह महिलाएं भी योजना में शामिल की जाएंगी, जिनके बच्चों ने दसवीं-बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हों। हालांकि, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की माताओं को ही इसका लाभ मिलेगा।
इन्हें नहीं मिलेगा योजना का लाभ
राष्ट्रीय पठन-बोध एवं संख्यात्मकता प्रवीणता पहल (निपुण भारत मिशन) के अंतर्गत सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार, कक्षा 1, 2, 3 और 4 में कक्षा-स्तरीय दक्षता प्राप्त करने वाले छात्रों तथा कुपोषण से अपने बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालने वाली माताएं भी योजना की पात्र होंगी।
तीन से अधिक बच्चे होने पर योजना का लाभ नहीं मिलेगा। पेंशन के लिए महिलाओं को लाडो लक्ष्मी एप के माध्यम से चेहरे की पहचान करानी होगी।
योजना के दुरुप पर होगी कार्रवाई
अगर कोई महिला गलत तरीके से योजना का लाभ उठाती पाई गई, तो उससे 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर के साथ पूरी राशि की रिकवरी की जाएगी। वसूली आवेदक या उसके परिवार के सदस्य जैसे- पति और पुत्र से की जा सकती है।
अगर लाभार्थी के नाम पर कोई चल या अचल संपत्ति नहीं है, तो डिक्री को लागू करने के लिए दीवानी कारावास का प्रावधान है।

