बिहार चुनाव 2025: तेजस्वी यादव की दो वोटर ID पर JDU सांसद संजय झा का तंज – “तो समर्थकों के पास कितनी होंगी?”
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले RJD नेता तेजस्वी यादव दो EPIC नंबर विवाद में घिर गए हैं। JDU सांसद संजय झा ने इस पर तंज कसते हुए कहा, “अगर तेजस्वी के पास दो वोटर ID हैं, तो उनके समर्थकों के पास कितनी होंगी?”
🗳️ विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
1 अगस्त 2025 को तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि उनका नाम मतदाता सूची से गायब है। उन्होंने EPIC नंबर RAB0456228 दिखाते हुए निर्वाचन आयोग पर लापरवाही का आरोप लगाया।
लेकिन इसी दौरान उन्होंने एक दूसरा EPIC नंबर RAB2916120 भी पेश किया, जो चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है। इसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक तूल पकड़ गया।
🧾 चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि तेजस्वी का नाम ड्राफ्ट रोल में पहले से मौजूद है और RAB0456228 नंबर ही वैध है।
आयोग ने दूसरा EPIC नंबर “अवैध” करार देते हुए तेजस्वी को नोटिस भेजकर वास्तविक दस्तावेज पेश करने को कहा है।
आयोग ने इसे “प्रथम दृष्टया गंभीर मामला” बताया है और जांच जारी है।
🎯 संजय झा का बयान
JDU सांसद संजय कुमार झा ने इस पूरे विवाद पर कटाक्ष करते हुए कहा:
“अगर नेता प्रतिपक्ष के पास दो वोटर ID हैं, तो उनके कार्यकर्ताओं के पास कितनी होंगी? यह एक संगठित गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।”
उन्होंने तेजस्वी पर जनता को गुमराह करने और चुनाव आयोग की छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
🔥 राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
| पक्ष | बयान |
|---|---|
| राजद (तेजस्वी यादव) | चुनाव आयोग मतदाता सूची में व्यापक गड़बड़ी कर रहा है, खासकर गरीब और मुस्लिम वोटरों के साथ |
| JDU व BJP | तेजस्वी खुद फर्जीवाड़े में लिप्त हैं; दो EPIC नंबर रखना कानूनन अपराध |
| चुनाव आयोग | EPIC नंबरों की जांच जारी; नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई संभव |
⚖️ कानूनी दायरा: क्या है सजा?
यदि किसी के पास दो या फर्जी वोटर कार्ड पाए जाते हैं तो यह:
भारतीय दंड संहिता की धारा 171F (दुर्भावनापूर्ण रूप से चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करना) के तहत अपराध है।
दोषी पाए जाने पर 1 से 3 साल तक की जेल और जुर्माना संभव है।
📌 निष्कर्ष
बिहार चुनाव 2025 के पहले, यह विवाद सिर्फ तेजस्वी यादव तक सीमित नहीं है बल्कि चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची की शुद्धता और लोकतंत्र की नींव को लेकर गंभीर प्रश्न उठा रहा है।
संजय झा का यह तंज न सिर्फ तेजस्वी पर निशाना है बल्कि पूरे विपक्षी ढांचे की वैधता को चुनौती देने जैसा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि चुनाव आयोग इस पर क्या ठोस कार्रवाई करता है और तेजस्वी यादव क्या स्पष्टीकरण देते हैं।

