नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जसोला इलाके में नाले में गिरे बच्चे की चौथे दिन तलाश पूरी हुई। 22 अगस्त की सुबह करीब 11:54 बजे बच्चे के नाले में गिरने की सूचना मिलने के बाद शुरू हुआ रेस्क्यू आपरेशन लगातार चार दिन तक चला।
मंगलवार को आखिरकार मिथुन का शव नाले से बरामद कर लिया गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए एम्स भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वजह स्पष्ट हो सकेगी।
बच्चे की तलाश में अग्निशमन विभाग, एनडीआरएफ, बोट क्लब और प्रशासन की टीमें जुटी थीं। नाले में पानी के साथ दलदल और गहराई होने के कारण अभियान में काफी दिक्कत आई। नाले के अलग-अलग हिस्सों में जेसीबी और अन्य मशीनरी की मदद से भी तलाशी अभियान चलाया गया। हालांकि, हादसे के बाद से ही बच्चे के स्वजन रेस्क्यू आपरेशन के तरीके और उसकी गति को लेकर सवाल उठाते रहे।
शुरुआती घंटों में रेस्क्यू आपरेशन पर पिता ने उठाए सवाल
बच्चे के पिता का आरोप है कि शुरुआती घंटों में जिस तरह तलाश की जा रही थी, उससे उन्हें भरोसा नहीं हुआ। उनका कहना है कि नाले में सिर्फ बांस और डंडे डालकर बच्चे की तलाश करने से सफलता मिलने की उम्मीद कम थी। जब उन्हें लगा कि अभियान अपेक्षित तेजी से नहीं चल रहा है तो वह खुद अपने बच्चे की तलाश के लिए नाले में उतर गए।
पिता के मुताबिक, यदि शुरुआती समय में प्रशिक्षित गोताखोरों को नाले में उतारा जाता और पानी के बहाव, गहराई व दलदली स्थिति को देखते हुए आधुनिक उपकरणों के साथ बड़े स्तर पर सर्च अभियान चलाया जाता तो बच्चे का पता पहले लगाया जा सकता था। परिवार का यह भी कहना है कि हादसे के बाद रेस्क्यू टीमों की नाले तक पहुंच और तलाशी की व्यवस्था को लेकर भी कई खामियां नजर आईं।
सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवाल
इधर, हादसे के बाद घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बच्चे के नाले में गिरने वाली जगह पर अब प्रशासन की ओर से अस्थायी पुल बनाया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले से यहां सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था होती तो हादसा टाला जा सकता था।
उनका सवाल है कि आखिर किसी घटना के बाद ही सुरक्षा इंतजाम क्यों किए गए। हालांकि, बच्चे की मौत के लिए किसी की लापरवाही को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराना अभी जल्दबाजी होगी।
यह जांच का विषय है कि हादसे की वजह क्या थी और रेस्क्यू आपरेशन में कहीं कोई कमी रही या नहीं। लेकिन तीन दिन तक चले अभियान के बाद शव मिलने से नाले के आसपास सुरक्षा व्यवस्था के साथ आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

