पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य ने हाई कोर्ट में दायर की याचिका, ED की हिरासत में चल रही पूछताछ
रायपुर / बिलासपुर | 6 अगस्त 2025
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई तेज हो गई है। चैतन्य ने इस गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार करते हुए उच्च न्यायालय का रुख करने की सलाह दी थी।
🔍 गिरफ्तारी कैसे हुई?
18 जुलाई 2025 को उनके जन्मदिन के दिन ही, ED ने भिलाई स्थित उनके आवास से उन्हें गिरफ्तार किया था।
उन पर आरोप है कि उन्होंने कथित ₹2,100 करोड़ के शराब घोटाले से उत्पन्न आय में से ₹16.7 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग की है।
इस धनराशि को उन्होंने शेल कंपनियों और संपत्ति सौदों के माध्यम से सफेद करने का प्रयास किया।
🧾 ईडी के आरोप क्या हैं?
चैतन्य बघेल ने दिल्ली और रायपुर स्थित कई शेल कंपनियों के जरिए पैसा ट्रांसफर किया।
इस राशि से ‘विठ्ठल ग्रीन्स’ और अन्य रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश किया गया।
कारोबारी पप्पू बंसल और विजय अग्रवाल जैसे सहयोगियों के बयान, दस्तावेज और पेन ड्राइव के माध्यम से इन लेनदेन की पुष्टि हुई है।
⚖️ अब क्या हो रहा है?
चैतन्य बघेल फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं, और अगली सुनवाई 18 अगस्त को होनी है।
बिलासपुर हाई कोर्ट में दाखिल याचिका में उन्होंने कहा है कि ED की कार्रवाई संविधान और PMLA कानून की धारा 44, 50 और 66 का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि गिरफ्तारी की वैधता पर विचार उच्च न्यायालय ही कर सकता है।
🗣️ भूपेश बघेल ने क्या कहा?
पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने इसे पूरी तरह से राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। उन्होंने कहा:
“मैंने हमेशा जनहित के मुद्दे, विशेषकर बड़े उद्योगपतियों के खिलाफ आवाज़ उठाई है। ये गिरफ्तारी उसी का नतीजा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ED और अन्य जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है ताकि विपक्ष को दबाया जा सके।
📊 मामला कितना गंभीर है?
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| गिरफ्तारी की तारीख | 18 जुलाई 2025 |
| एजेंसी | प्रवर्तन निदेशालय (ED) |
| आरोप | ₹16.7 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग |
| मुख्य मामला | ₹2,100 करोड़ का शराब घोटाला |
| कानूनी स्थिति | न्यायिक हिरासत, HC में याचिका |
🔚 निष्कर्ष
चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या जांच एजेंसियों की कार्रवाई निष्पक्ष है या इसके पीछे कोई राजनीतिक मंशा छिपी है।
बहरहाल, अब यह मामला उच्च न्यायालय में है और इसकी कानूनी वैधता पर आने वाले समय में बड़ा फैसला आ सकता है, जो राजनीतिक और न्यायिक प्रणाली—दोनों के लिए निर्णायक सिद्ध हो सकता है।

