दक्षिणी दिल्ली। जब नेहरू-लियाकत एक्ट हुआ तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बड़े स्पष्ट शब्दों में बोला था कि इसका कोई खास लाभ नहीं मिलने वाला है। बल्कि उल्टा जो पाकिस्तान में हिंदू हैं, उनके ऊपर अन्याय करने का एक आधार मिल जाएगा।
बाद में यही सच साबित हुआ। कश्मीर में हिंदुओं के ऊपर अन्याय की कहानियां आप सबने सुनी होंगी। पर वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सीएए कानून लाकर विभाजन के समय के गलतियों को सुधारने का काम किया है।
यह बातें एनएसयूआई ऑडिटोरियम में रविवार को आयोजित डॉ. मुखर्जी स्मृति संगोष्ठी में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कही।
वंदे मातरम् से कांग्रेस को आपत्ति थी
उन्होंने कहा कि जब हम वंदे मातरम् गाते हैं तो उसमें कांग्रेस को आपत्ति थी, जिसके बाद इसके कई हिस्सों को हटाया गया, पर अब एक बार फिर से वंदे मातरम् के पूरा गान हम भारतीय गाने लगे हैं।
यानि देश को राजनीतिक सोच से जरूर तोड़ा जा सकता है, लेकिन सांस्कृतिक दृष्टि से नहीं तोड़ा जा सकता है। सांस्कृतिक चेतना हमेशा अविभाज्य रहती है। स्वदेशी को लेकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचार बिल्कुल स्पष्ट थे।
आज उन्हीं विचारों से प्रेरणा लेकर प्रधानमंत्री मोदी ने स्वदेशी निर्माण कार्य में बेमिसाल काम किया है जिसका परिणाम है कि आज हम दुनिया में नंबर दो के मोबाइल निर्माता देश बन गए हैं।
‘1947 में मिलने वाली आजादी अधूरी है’
डॉ. मुखर्जी ने कहा था कि 1947 में मिलने वाली आजादी अधूरी है, क्योंकि उस वक्त जब उन्होंने कश्मीर जाने चाहा तो उस वक्त कश्मीर में जाने की अनुमति नहीं थी।
वह आजादी जो 1947 में अधूरी थी उसे पूरा करने का काम प्रधानमंत्री मोदी ने किया, जब उन्होंने पांच अगस्त 2019 में कश्मीर से धारा 370 को हटाया। भाजपा कार्यकर्ता वह हैं, जिन्होंने इस देश की अखंडता के लिए समय-समय पर बलिदान दिया।
डॉ. मुखर्जी के बलिदान के बाद देश में जो वातावरण बना उससे कश्मीर में प्रधानमंत्री का पद समाप्त हुआ और सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू हुआ।
इस दौरान सांसद बांसुरी स्वराज, दिल्ली जलबोर्ड उपाध्यक्ष सतीश उपाध्याय, विधायक नीरज बसोया व अनिल शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष रविन्द्र चौधरी, पूर्व प्रदेश मंत्री सुमित्रा दहिया आदि ने भी विचार व्यक्त किए।

