उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, मेड-इन-यूपी ईवी पर 20 लाख तक की सब्सिडी
लखनऊ, अगस्त 2025 — उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए अपनी ईवी निर्माण एवं मोबिलिटी नीति 2022 को अब 2027 तक बढ़ा दिया है। इस नीति के तहत विशेष रूप से यूपी में निर्मित ईवी पर आकर्षक सब्सिडी और टैक्स छूट दी जा रही है। इसका मकसद हरित परिवहन को बढ़ावा देना, स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
सब्सिडी और टैक्स छूट का लाभ
सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के इलेक्ट्रिक वाहनों पर एकमुश्त सब्सिडी का प्रावधान किया है:
2-व्हीलर ईवी: अधिकतम ₹5,000 (फैक्ट्री मूल्य का 15%) – 2 लाख वाहनों तक
3-व्हीलर ईवी: ₹12,000 तक – 50,000 वाहनों तक
4-व्हीलर ईवी: ₹1 लाख तक – 25,000 वाहन
निजी ई-बसे: ₹20 लाख तक – 400 बसों पर
ई-गुड्स कैरियर: ₹1 लाख तक – 1,000 वाहन
इसके अलावा, पहले तीन वर्षों तक सभी ईवी पर रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स पूरी तरह माफ रहेगा। चौथे और पांचवें वर्ष में यह छूट केवल यूपी में बने ईवी पर लागू होगी।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण इकाइयों को प्रोत्साहन
राज्य सरकार चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों की स्थापना के लिए 20% पूंजी सब्सिडी देगी। चार्जिंग स्टेशन के लिए अधिकतम ₹10 लाख और स्वैपिंग स्टेशन के लिए ₹5 लाख की सहायता दी जाएगी।
बड़े निवेशकों और MSMEs के लिए सरकार ने निवेश आधारित प्रोत्साहन की घोषणा की है:
अल्ट्रा मेगा बैटरी प्रोजेक्ट: 30% सब्सिडी, अधिकतम ₹1,000 करोड़
मेगा ईवी/बैटरी परियोजनाएं: 20% सब्सिडी, ₹500 करोड़ तक
MSME और बड़े प्रोजेक्ट्स: 10%–18% सब्सिडी
राज्य के लिए क्या होगा फायदा?
इस नीति के तहत सरकार का लक्ष्य ₹30,000 करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित करना और 10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार देना है। इसके अलावा, नीति से प्रदेश में ईवी की बिक्री को नई रफ्तार मिलेगी और पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी पर्यावरण के अनुकूल होगा।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश की नई ईवी नीति राज्य को हरित तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। यह नीति न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि उद्योग, निवेश और रोजगार को भी नई उड़ान देने वाली है। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की सोच रहे उपभोक्ताओं के लिए यह सबसे अच्छा समय हो सकता है।

