देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोर्ट ने 2025 में मुख्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई, लेकिन मामला अभी भी सुर्खियों में है। 19 साल की अंकिता, जो ऋषिकेश के वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं, की 2022 में हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके कर्मचारियों ने उन्हें ‘स्पेशल सर्विस’ देने के लिए दबाव डाला, जिसका विरोध करने पर हत्या हुई। यह घटना न केवल न्याय की मांग को लेकर चर्चा में रही, बल्कि उत्तराखंड की टूरिज्म इंडस्ट्री में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है।
सीबीआई जांच या दोषियों की सजा से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है कि राज्य की होटल और सर्विस इंडस्ट्री में काम करने वाली हजारों बेटियां-बहनें सुरक्षित हैं या नहीं। उत्तराखंड में पर्यटन तेजी से बढ़ रहा है। होटलों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है, जिससे रोजगार के अवसर तो खुल रहे हैं, लेकिन महिलाओं के लिए खतरे भी। होटल इंडस्ट्री में रिसेप्शनिस्ट, हाउसकीपिंग या अन्य भूमिकाओं में काम करने वाली महिलाएं अक्सर असुरक्षित महसूस करती हैं। ग्राहकों या मालिकों का दबाव, देर रात ड्यूटी और अलग-थलग जगहें – ये सभी जोखिम बढ़ाते हैं।
इसी संदर्भ में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए बना यौन उत्पीड़न निवारण अधिनियम 2013 (POSH Act) बेहद प्रासंगिक है। यह कानून हर उस संस्थान पर लागू होता है जहां 10 या इससे अधिक कर्मचारी काम करते हैं। होटलों में यह अनिवार्य है कि आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee – ICC) गठित की जाए, महिलाओं को जागरूक किया जाए और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित हो। कानून के तहत नियोक्ता को सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करना, शिकायतों की गोपनीय जांच और दंड की व्यवस्था करनी होती है। यदि POSH का सख्ती से पालन होता, तो शायद अंकिता जैसी घटनाएं रोकी जा सकती थीं। रिजॉर्ट में अगर ICC होती और अंकिता उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कर पातीं, तो हत्या तक बात नहीं पहुंचती।
दुर्भाग्यवश, उत्तराखंड सहित देश के कई हिस्सों में POSH अधिनियम का कार्यान्वयन कमजोर है। कई होटल छोटे होने के बहाने इसे नजरअंदाज करते हैं। जागरूकता की कमी, समिति का अभाव और शिकायत करने पर डर – ये समस्याएं आम हैं। टूरिज्म सेक्टर में जहां अनौपचारिक रोजगार ज्यादा है, वहां यह कानून और भी कम प्रभावी साबित होता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी POSH के क्रियान्वयन में खामियां उजागर की हैं।
एल्डा फाउंडेशन की अध्यक्ष एवं सर्टिफाइड पोश ट्रेनर डॉ. पूजा शाहीन जैसी सामाजिक कार्यकर्ता लंबे समय से POSH कानून के सख्त पालन की वकालत कर रही हैं। उनका कहना है कि उत्तराखंड जैसे पर्यटन प्रधान राज्य में होटल इंडस्ट्री को POSH को पूरी तरह लागू करना चाहिए। व्यवस्थित तरीके से ट्रेनिंग, ICC गठन और नियमित ऑडिट जरूरी है। डॉ. शाहीन के अनुसार, अंकिता हत्याकांड जैसी घटनाओं से सबक लेकर सरकार को सभी होटलों में POSH की अनुपालन जांच अभियान चलाना चाहिए। महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी देनी चाहिए और शिकायत पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। सरकार को होटल लाइसेंस नवीनीकरण को POSH अनुपालन से जोड़ना चाहिए। पुलिस और महिला आयोग को संयुक्त सर्वे करने चाहिए। NGOs के साथ मिलकर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं। सबसे महत्वपूर्ण, महिलाओं को विश्वास दिलाना कि उनकी शिकायत सुनी जाएगी और न्याय मिलेगा।
अंकिता की हत्या ने उत्तराखंड को झकझोर दिया। अब समय है कि जांच और सजा से आगे बढ़कर हम अपनी बेटियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें। POSH 2013 सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं की गरिमा और अधिकार का प्रतीक है। इसे पूरी तरह लागू करना हर होटल मालिक और सरकार की जिम्मेदारी है। तभी उत्तराखंड में ‘देवभूमि’ बनेगा, जहां हर बेटी सुरक्षित हो।

