खाद संकट पर बोले हरैया के विधायक अजय सिंह: किसानों से मांगी माफी, मानी सरकार की चूक
बस्ती (उत्तर प्रदेश) | 28 अगस्त 2025 — उत्तर प्रदेश के बस्ती ज़िले की हरैया विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक अजय सिंह ने खाद की कमी को लेकर किसानों से माफी मांगते हुए माना है कि सरकार की लापरवाही और व्यवस्थागत खामियों के चलते किसानों को परेशानी उठानी पड़ी। यह बयान उन्होंने ज़िला अधिकारी कार्यालय में आयोजित एक समीक्षा बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में दिया।
🔶 विधायक का स्पष्ट स्वीकार — “गलती हमारी थी”
अजय सिंह ने कहा कि राज्य में खाद की कोई कमी नहीं थी, लेकिन 116 सहकारी समितियों में से बहुत कम समितियाँ सक्रिय रहीं, जिससे खाद वितरण प्रभावित हुआ। उन्होंने यह स्वीकार करते हुए कहा:
“यह हमारी प्रशासनिक चूक थी। इसका असर किसानों पर पड़ा, और मैं इसके लिए माफी मांगता हूँ। हम इस गलती से सीखेंगे और सुधार करेंगे।”
उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
🔶 सरकारी स्तर पर मंथन और विपक्ष की सख़्त आलोचना
विधायक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस संकट को लेकर चर्चा की और उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराया। हालांकि इस मसले पर विपक्ष खासतौर पर समाजवादी पार्टी ने सरकार को घेरा है। कई जिलों से ऐसी खबरें आईं कि पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद किसानों को लंबी कतारों, अफरातफरी और लाठीचार्ज जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ा।
🔶 बहराइच में इस्तीफा, पार्टी पर दबाव
खाद संकट को लेकर बीजेपी के भीतर भी असंतोष देखा गया। बहराइच जिले के बीजेपी किसान मोर्चा अध्यक्ष जीतेंद्र प्रताप सिंह ने इस्तीफा देते हुए कहा कि सरकार की निष्क्रियता ने उन्हें बेबस कर दिया और वे किसानों की मदद नहीं कर पा रहे हैं। यह इस्तीफा पार्टी के भीतर संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
🔶 कृषि मंत्री का दावा — “राज्य में पर्याप्त स्टॉक”
वहीं राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने खाद संकट की खबरों को भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि राज्य में यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण है। सरकार ने कालाबाज़ारी और जमाखोरी पर निगरानी तेज कर दी है और समय पर खाद आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
📊 मुख्य बिंदु सारांश
| विषय | विवरण |
|---|---|
| विधायक | अजय सिंह (हरैया, बस्ती) |
| समस्या का कारण | खाद वितरण में प्रशासनिक चूक |
| माफी | किसानों से सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना |
| सरकार का रुख | कृषि मंत्री का दावा — स्टॉक पर्याप्त है |
| विपक्ष की भूमिका | सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप |
| अन्य घटनाएं | बहराइच में बीजेपी किसान मोर्चा अध्यक्ष का इस्तीफा |
✅ निष्कर्ष: एक ज़िम्मेदार कदम या राजनीतिक दबाव?
विधायक अजय सिंह का माफी मांगना भारतीय राजनीति में एक दुर्लभ और जिम्मेदार पहल के रूप में देखा जा रहा है। यह स्वीकारोक्ति न सिर्फ किसानों के प्रति सहानुभूति को दर्शाती है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि सरकारी योजनाओं की विफलता का असर सीधे ज़मीन पर दिखता है।
अब जरूरत इस बात की है कि सरकार खाद वितरण व्यवस्था को और पारदर्शी बनाए, सहकारी समितियों को जवाबदेह बनाए, और किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता दे।

