छत्तीसगढ़ के कोरबा में स्वास्थ्य तंत्र बेहाल: 7 KM तक मरीज को खाट पर लिटाकर ले गए परिजन
कोरबा, छत्तीसगढ़ — राज्य में बारिश के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। कोरबा जिले के पाली विकासखंड के ग्राम जलहल में एक बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए उसके परिजनों को 7 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा, वह भी झमाझम बारिश और कीचड़ से भरे रास्तों में, क्योंकि वहां एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकी।
📍 मामला कहां और क्या हुआ?
ग्राम पंचायत बारीउमराव अंतर्गत जलहल गांव, जिला मुख्यालय से लगभग 37 किलोमीटर दूर स्थित है। जब 37 वर्षीय करसीला एक्का को तेज बुखार आया और स्थिति बिगड़ने लगी, तो परिजनों ने तुरंत 108 संजीवनी एक्सप्रेस को कॉल किया। लेकिन, खराब रास्तों और बारिश के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी।
🚶♂️ 7 किलोमीटर पैदल संघर्ष
परिजन हार नहीं माने। उन्होंने करसीला को एक खाट पर लिटाया, ऊपर से तिरपाल से ढका, और पूरे 7 किलोमीटर कीचड़ भरे उबड़-खाबड़ रास्ते पर पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक पहुंचे। वहां से एक निजी वाहन की मदद से महिला को पाली के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत अब स्थिर है।
⚠️ सिस्टम की बड़ी नाकामी
सड़क नहीं, सुविधा नहीं: जलहल जैसे कई गांव आज भी पक्की सड़क से वंचित हैं। बारिश के मौसम में ये रास्ते जानलेवा साबित होते हैं।
108 सेवा की विफलता: एंबुलेंस सेवा न केवल देरी से पहुंची, बल्कि खराब रास्ते की वजह से गांव तक पहुंच ही नहीं सकी।
स्थानीय प्रशासन की उदासीनता: ग्रामीण लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
🧭 क्या होना चाहिए? (सुझाव)
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए इमरजेंसी हेल्थ रिस्पांस यूनिट्स स्थापित की जाएं।
संपर्क सड़क निर्माण को प्राथमिकता दी जाए, विशेषकर उन गांवों में जो मानसून में कट जाते हैं।
108 जैसी सेवाओं के लिए ऑफ-रोड सपोर्ट वाहन उपलब्ध कराए जाएं।
हर ग्राम पंचायत स्तर पर स्थायी स्वास्थ्य कर्मी और प्राथमिक उपचार केंद्र बनाए जाएं।
📢 निष्कर्ष
यह घटना केवल एक गांव की नहीं है—यह छत्तीसगढ़ के ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे की गहरी समस्या को उजागर करती है। अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में ऐसी घटनाएं और भी आम हो जाएंगी।

