बस्तर में ऐतिहासिक आत्मसमर्पण: 66 नक्सलियों ने किया सरेंडर, ₹2.54 करोड़ का था इनाम
📍 रायपुर | 25 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता सामने आई है। एक ही दिन में 66 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिनमें से 49 पर कुल मिलाकर ₹2.54 करोड़ का इनाम घोषित था। यह छत्तीसगढ़ पुलिस और प्रशासन के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
📍 कहाँ हुआ सरेंडर?
ये आत्मसमर्पण बस्तर के पांच ज़िलों — बिजापुर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, नारायणपुर और सुकमा — में हुए हैं। ये सभी ज़िले लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का केंद्र रहे हैं।
🧾 सरेंडर करने वालों में कौन शामिल?
रामन्ना इरपा उर्फ जगदीश उर्फ विकास – विशेष ज़ोनल कमेटी सदस्य, जिस पर ₹25 लाख का इनाम था
4 डिवीजनल कमेटी सदस्य – प्रत्येक पर ₹8 लाख
10 PLGA कैडर सदस्य – प्रत्येक पर ₹5 लाख
15 एरिया कमेटी सदस्य
7 लोकल ऑपरेशन स्क्वाड सदस्य
29 अन्य नक्सली
इनमें कई महिला नक्सली भी शामिल थीं जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय थीं।
🎯 सरकार की रणनीति और पहल
इस आत्मसमर्पण के पीछे छत्तीसगढ़ सरकार और सुरक्षा बलों की रणनीतिक पहलें अहम रही हैं:
🔹 पुनर्वास योजनाएं:
‘Poona Margham’, ‘Lon Varratu’, और ‘Niyad Nellanar’ जैसी योजनाओं ने नक्सलियों को मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में प्रेरित किया।
आत्मसमर्पण करने वाले हर नक्सली को ₹50,000 तत्काल सहायता, प्रशिक्षण, और रोज़गार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।
🔹 सुरक्षा बलों की सक्रियता:
बस्तर रेंज के IG सुदंरराज पी. के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को बढ़ावा देने से नक्सलियों में असंतोष बढ़ा है।
सरकार द्वारा लगातार गांवों तक सुरक्षा और शासन की पहुंच बढ़ाई जा रही है।
📊 आत्मसमर्पण का सारांश
| श्रेणी | संख्या | इनाम राशि |
|---|---|---|
| कुल सरेंडर | 66 | ₹2.54 करोड़ |
| इनामी नक्सली | 49 | ₹2.27–2.54 करोड़ (स्रोत भिन्नता) |
| शीर्ष नेता | रामन्ना इरपा | ₹25 लाख |
| महिला सदस्य | 18+ | शामिल |
🛡️ प्रशासन का बयान
IG सुंदरराज पी. ने कहा:
“यह केवल एक सुरक्षा सफलता नहीं, बल्कि सामाजिक पुनर्संयोजन का प्रमाण है। यह संकेत है कि नक्सलवाद अब पीछे हट रहा है और विकास जीत रहा है।”
🔮 आगे की राह
सरेंडर करने वालों की स्क्रीनिंग के बाद उन्हें पुनर्वास केंद्र भेजा जाएगा।
सरकार की योजना है कि 2025 के अंत तक और 200 से अधिक सक्रिय नक्सलियों को आत्मसमर्पण के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
📝 निष्कर्ष
बस्तर में एक ही दिन में 66 नक्सलियों का आत्मसमर्पण शांति, विकास और जागरूकता का प्रतीक बन चुका है। यह सफलता दिखाती है कि प्रभावी प्रशासनिक प्रयास और संवेदनशील पुनर्वास योजनाएं नक्सलवाद जैसी जटिल समस्याओं का समाधान बन सकती हैं।

