बचेली / दंतेवाड़ा: एनएमडीसी (NMDC) की स्थापना के बाद से बचेली क्षेत्र में बसे काठमांडू के निवासियों का पुनर्वास और विस्थापन लंबे समय से एक गंभीर समस्या बना हुआ है। वर्ष 2018-19 में एनएमडीसी के सीएसआर (CSR) फंड की मदद से पीडब्ल्यूडी (PWD) दक्षिण बस्तर संभाग, दंतेवाड़ा द्वारा लगभग 349.23 लाख रुपये (3.49 करोड़ रुपये) की लागत से ‘नगर पालिका आवासीय क्वार्टर (झुग्गी-झोपड़ी विस्थापितों के लिए)’ का निर्माण कार्य शुरू किया गया था।
बहुमंजिला इमारतें बनकर पूरी तरह तैयार भी हो गईं। लेकिन विडंबना यह है कि निर्माण पूरा होने के बाद अधिकारियों को यह सुध आई कि इस स्थल पर जलापूर्ति का कोई साधन ही नहीं है। जमीन के नीचे चट्टान होने के कारण पानी की गंभीर किल्लत सामने आई। किसी भी आवासीय परियोजना से पहले जल स्रोत का सर्वे होना अनिवार्य है, परंतु प्रशासनिक अदूरदर्शिता और योजना की भारी खामी के कारण करोड़ों रुपये की लागत से बनी इमारतें अब बिना उपयोग के खाली खड़ी हैं।
न स्वास्थ्य सुविधा, न राशन; बुनियादी सुविधाओं से दूर हैं ग्रामीण
काठमांडू क्षेत्र के निवासी आज भी मुख्यधारा से कटे हुए हैं और दयनीय स्थिति में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।
* मूलभूत सुविधाओं का अभाव: क्षेत्र में न तो प्राथमिक स्वास्थ्य (चिकित्सा) की कोई व्यवस्था है और न ही राशन दुकान की सुविधा उपलब्ध है। छोटी से छोटी दैनिक जरूरतों और इलाज के लिए निवासियों को काफी दूर जाना पड़ता है।
* मौसम की मार: पिछले कई वर्षों से बारिश के मौसम में इन परिवारों की हालत अत्यंत खराब हो जाती है। जर्जर और अस्थाई व्यवस्थाओं के बीच वे हर साल बरसात झेलने को मजबूर हैं।
* जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा: स्थानीय पार्षद, नगर पालिका अध्यक्ष या क्षेत्रीय विधायक, कोई भी जनप्रतिनिधि इन लोगों की स्थिति का जायजा लेने या हाल-चाल पूछने नहीं पहुंच रहा है। चुनावों के समय वोट तो ले लिए जाते हैं, लेकिन संकट के समय इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
मुख्यमंत्री और जिला कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की गुहार
तमाम स्थानीय स्तर पर उपेक्षा और व्यवस्थागत विफलता के बाद अब काठमांडू के असहाय निवासियों को केवल राज्य के माननीय मुख्यमंत्री जी और दंतेवाड़ा जिला कलेक्टर से ही न्याय की उम्मीद बची है।
निवासियों की मांग है कि:
* पीडब्ल्यूडी (PWD) एवं संबंधित निर्माण एजेंसी की लापरवाही की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
* निर्मित बहुमंजिला इमारतों में जलापूर्ति की तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था कर विस्थापन की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए।
* जब तक विस्थापन नहीं हो जाता, तब तक क्षेत्र में आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं, राशन आपूर्ति और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं तुरंत मुहैया कराई जाएं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी समस्याओं पर संज्ञान नहीं लिया गया, तो वे उग्र कदम उठाने को मजबूर होंगे।

