‘फांसी घर’ का सच: दिल्ली विधानसभा में इतिहास या भ्रम? | जानिए पूरा विवाद
दिल्ली | 6 अगस्त 2025
दिल्ली विधानसभा में एक ऐतिहासिक स्थान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जिसे अब तक ‘फांसी घर’ (Hanging House) के रूप में प्रचारित किया गया था, उसे अब वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने “टिफिन रूम” करार दिया है। इस बयान ने सत्ता और विपक्ष के बीच बहस छेड़ दी है।
🔍 क्या है ‘फांसी घर’?
वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा परिसर में एक कमरे का उद्घाटन करते हुए दावा किया था कि यह ब्रिटिश काल का फांसी घर है, जहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी। उस समय के स्पीकर राम निवास गोयल ने भी इसे इतिहास से जोड़ते हुए ‘क्रांतिकारियों की कुर्बानी की निशानी’ बताया था।
🧭 2025 में क्या हुआ बदलाव?
2025 के मानसून सत्र में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह कक्ष दरअसल कोई फांसीघर नहीं, बल्कि एक ब्रिटिशकालीन टिफिन रूम है, जिसे संभवतः भोजन पहुँचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था।
उन्होंने नेशनल आर्काइव्स से प्राप्त नक्शों और विशेषज्ञों की राय का हवाला देते हुए बताया कि यह एक वेंटीलेशन डक्ट है, न कि कोई फांसी देने की जगह।
⚖️ दो खेमों में बंटी विधानसभा
🟠 भाजपा का पक्ष:
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि AAP सरकार ने इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया।
‘फांसी घर’ के नाम पर जनता को गुमराह किया गया।
उन्होंने मांग की कि इस स्थल को ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में प्रचारित करने से पहले जांच होनी चाहिए।
🔵 आप (AAP) का पक्ष:
विधायक आतिशी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि असली मुद्दों (पानी, बिजली, शिक्षा) से ध्यान हटाने के लिए यह सब किया जा रहा है।
आप विधायक जरनैल सिंह ने ChatGPT का हवाला देते हुए कहा कि इंटरनेट पर भी इसे फांसी घर कहा गया है, जिससे AAP के दावे की पुष्टि होती है।
🕵️ इतिहास क्या कहता है?
दिल्ली विधानसभा का भवन 1912 में ब्रिटिश शासन के दौरान बना था।
इसे पहले केंद्रीय विधान सभा, फिर अदालत और अब विधानसभा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
2016 में परिसर में एक सुरंग मिली थी, जिसे कुछ लोगों ने लाल किले से जोड़ने वाली सुरंग बताया।
उसी दौरान ‘फांसी घर’ की बात भी सामने आई थी, लेकिन इसका कोई पुख्ता ऐतिहासिक प्रमाण अब तक नहीं मिला है।
🧠 निष्कर्ष
| दावेदार | दावा | आधार |
|---|---|---|
| आप | यह कमरा फांसीघर था | 2022 का उद्घाटन, इंटरनेट सर्च |
| भाजपा | यह टिफिन रूम था | नेशनल आर्काइव नक्शे, ऐतिहासिक रिकॉर्ड |
यह विवाद न केवल इतिहास की व्याख्या का प्रश्न बन गया है, बल्कि राजनीति का एक नया मुद्दा भी बन गया है।
दिल्ली जैसे संवेदनशील और ऐतिहासिक शहर में इतिहास की सटीक जानकारी देना बेहद जरूरी है, ताकि भावनाओं और तथ्यों के बीच संतुलन बना रहे।

