जयपुर: 90 के दशक की मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी एक बार फिर सुर्खियों में हैं। प्रयागराज महाकुंभ के दौरान संन्यास लेकर किन्नर अखाड़े में ‘महामंडलेश्वर’ बनीं ममता कुलकर्णी को हाल ही में जयपुर में आयोजित 14वें ‘राजस्थान फिल्म फेस्टिवल’ में उनके पुराने ग्लैमरस अंदाज में देखा गया। इवेंट में उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
2025 के संन्यास के बाद बदला रूप: वेस्टर्न ड्रेस में किया डांस
इवेंट में ममता कुलकर्णी भगवा वस्त्रों की जगह वेस्टर्न और ग्लैमरस आउटफिट में नजर आईं। उन्होंने स्टेज पर और स्टूडेंट्स के साथ अपनी सुपरहिट फिल्मों के प्रसिद्ध गानों पर जमकर डांस किया और गाना भी गाया:
‘करण अर्जुन’: राणा जी हमको माफ करना गलती… और एक मुंडा मेरी उम्र का
‘घातक’: कोई जाए तो ले आए
‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’: लंबा-लंबा घूंघट
सोशल मीडिया पर उनके इस रूप के वीडियो वायरल होने के बाद यूजर्स तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं। किसी ने पूछा, “भगवा चोला कहां गया?” तो किसी ने लिखा, “यह तो साध्वी बन गई थीं।”
किन्नर अखाड़े की प्रतिक्रिया: “पहले ही बाहर कर दिया था”
ममता कुलकर्णी के पुराने अंदाज में लौटने पर किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“वह इस पद के लायक नहीं थीं, इसलिए उन्हें पहले ही अखाड़े से बाहर कर दिया गया था। अब वह कुछ भी करें, उनसे हमें कोई मतलब नहीं है।”
“नेल्लोर के लोगों ने तो मेरा मंदिर बनवा दिया था” — ममता कुलकर्णी
अवॉर्ड मिलने के बाद भावुक हुईं ममता कुलकर्णी ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया:
शुरुआती दौर: बॉलीवुड में आने से पहले दक्षिण भारत के नेल्लोर में फैंस ने उनके नाम पर एक मंदिर बनवा दिया था।
फिल्मी सफर: उन्होंने 1991 में तमिल फिल्म ‘ननबरगल’ से करियर की शुरुआत की। इसके बाद हिंदी सिनेमा में ‘तिरंगा’, ‘आशिक आवारा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘सबसे बड़ा खिलाड़ी’, ‘करण अर्जुन’, ‘घातक’ और ‘नसीब’ जैसी कई सुपर-डुपर हिट फिल्में कीं।
उन्होंने कहा कि इतने सालों बाद लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिलना उनके लिए बेहद भावुक पल है।
महाकुंभ में कैसे बनी थीं महामंडलेश्वर?
महाकुंभ के दौरान ममता कुलकर्णी किन्नर अखाड़ा पहुंची थीं। वहां उन्होंने अखाड़े की प्रमुख महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से मुलाकात की। चर्चा के बाद उन्हें ‘ममता नंदगिरी’ नाम देकर महामंडलेश्वर बनाने का ऐलान किया गया था। उन्होंने संगम तट पर अपना पिंड दान कर आध्यात्मिक जीवन अपनाने की बात कही थी।
महामंडलेश्वर बनने की धार्मिक प्रक्रिया
किसी साधु या व्यक्ति को अखाड़े में महामंडलेश्वर बनाने के लिए इन चरणों का पालन किया जाता है:
आवेदन और संन्यास दीक्षा: सबसे पहले अखाड़े में आवेदन करना होता है, जिसके बाद संन्यास की दीक्षा दी जाती है।
मुंडन और तर्पण: पवित्र नदी किनारे मुंडन कराकर स्नान कराया जाता है। इसके बाद साधक खुद का और अपने परिवार का पिंड दान (तर्पण) करता है।
विजय हवन और पट्टाभिषेक: गुरु बनाकर चोटी काटी जाती है। अखाड़े में दूध, घी, शहद, दही और शक्कर (पंचामृत) से ‘पट्टाभिषेक’ कर चादर भेंट की जाती है।
भंडारा और नियम: साधु-संतों को भोजन कराकर दक्षिणा दी जाती है। संन्यासी को सांसारिक परिवार से संबंध खत्म करने होते हैं और अपनी संपत्ति जनहित या संस्कृत शिक्षा के लिए दान करनी होती है।
विवादों से भी रहा पुराना नाता
शाहरुख खान, सलमान खान, अजय देवगन और अनिल कपूर जैसे बड़े स्टार्स के साथ काम करने वाली ममता कुलकर्णी अपने दौर में कई विवादों में भी रहीं:
टॉपलेस फोटोशूट (1993): ‘स्टारडस्ट’ मैगजीन के लिए कराए गए बोल्ड और टॉपलेस फोटोशूट से वे रातों-रात विवादों में आ गई थीं।
‘चाइना गेट’ विवाद: डायरेक्टर राजकुमार संतोषी उन्हें फिल्म से बाहर करना चाहते थे, लेकिन खबरों के मुताबिक अंडरवर्ल्ड के दबाव के बाद उन्हें फिल्म में रखा गया। बाद में ममता ने निर्देशक पर गंभीर आरोप भी लगाए थे।
करियर पर एक नज़र
जन्म: 20 अप्रैल 1972 (मुंबई)
पहला ब्रेक: 1991 (तमिल फिल्म ‘ननबरगल’ और हिंदी फिल्म ‘मेरा दिल तेरे लिए’)
फिल्मफेयर अवॉर्ड: 1993 में फिल्म ‘आशिक आवारा’ के लिए बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला।
कुल फिल्में: IMDb के अनुसार उन्होंने कुल 34 फिल्मों में काम किया। उनकी आखिरी फिल्म ‘कभी तुम कभी हम’ साल 2002 में रिलीज हुई थी।

