बीजापुर में नक्सलियों ने फिर की शिक्षादूत की हत्या, अब तक कुल संख्या पहुंची 9
बीजापुर, छत्तीसगढ़: नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में अपनी हिंसा जारी रखते हुए एक बार फिर एक शिक्षादूत की हत्या कर दी है। यह घटना नक्सली आतंकवाद की उस निरंतर श्रृंखला का हिस्सा है जिसमें शिक्षकों को खासतौर से निशाना बनाया जा रहा है। अब तक कम से कम नौ शिक्षादूतों की जान जा चुकी है, जिससे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
घटना का पूरा विवरण
30 अगस्त 2025 की रात गंगालूर क्षेत्र के नेन्द्रा गांव के समीप स्कूल से लौट रहे शिक्षादूत कल्लू ताती को नक्सलियों ने अगवा कर बेरहमी से हत्या कर दी। यह वारदात बीजापुर में नक्सली हिंसा की लगातार बढ़ती लहर की ताजा मिसाल है, जो 2023 से जारी है।
इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि शिक्षा विभाग को भी चिंतित कर दिया है, क्योंकि शिक्षकों को लगातार खतरा बढ़ता जा रहा है।
पिछली हत्याओं की झलक
इससे पहले 15 जुलाई 2025 को फरसेगढ़ थाना क्षेत्र में नक्सलियों ने दो शिक्षादूतों, विनोद माडे और सुरेश मेट्टा की हत्या की थी। आरोप है कि उन्हें पुलिस मुखबिरी के शक में निशाना बनाया गया था। यह भी एक जंगल क्षेत्र में हुई घटना थी जिसने इलाके में दहशत फैलाई।
इसी तरह, मई 2025 में बीजापुर के उसूर और पामेड थाना क्षेत्रों में तीन दिनों के अंदर पांच लोगों की हत्या हुई, जिनमें शिक्षादूत, एक रसोइया और अन्य ग्रामीण शामिल थे।
नक्सली हिंसा का व्यापक परिदृश्य
बीजापुर जिले में नक्सली पिछले कुछ वर्षों से शिक्षा और सामाजिक विकास के लिए काम करने वाले लोगों को खासतौर पर निशाना बना रहे हैं। शिक्षादूतों को अक्सर पुलिस के मुखबिर बताकर उनकी हत्या की जाती है। यह एक सुनियोजित रणनीति है, जिसका मकसद नक्सल प्रभावित इलाकों में अपनी पकड़ और नियंत्रण मजबूत करना है।
प्रशासन और सरकार के सामने बड़ी चुनौती
स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह चुनौती बनी हुई है कि वे शिक्षकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें और नक्सलियों की इस हिंसक प्रवृत्ति को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं। हालांकि सुरक्षा के कुछ इंतजाम किए गए हैं, लेकिन अभी भी खतरा कायम है।
निष्कर्ष
बीजापुर में नक्सली हिंसा और शिक्षादूतों की लगातार हो रही हत्याएं गंभीर सामाजिक एवं सुरक्षा संकट की ओर इशारा करती हैं। शिक्षादूत समाज के विकास की नींव होते हैं और उनकी सुरक्षा के बिना क्षेत्र का समग्र विकास संभव नहीं। इसलिए सरकार, सुरक्षा बल और स्थानीय समुदाय को मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान ढूंढना होगा, ताकि शिक्षा का संदेश शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में पहुंच सके।

