गाजियाबाद। जिले में नो डिस्प्ले मीटर बिजली चोरी का नया जरिया बनते जा रहे हैं। विद्युत निगम के अनुसार पिछले तीन महीनों में जिले में ऐसे 350 मीटर पकड़े गए हैं, जिनकी स्क्रीन पूरी तरह बंद मिली।
ऐसे मामलों में मीटर पर बिजली की खपत, रीडिंग और अन्य तकनीकी जानकारी दिखाई नहीं देती, जिससे वास्तविक खपत का आकलन प्रभावित होता है। विभाग का मानना है कि तकनीकी खराबी के साथ-साथ कई मामलों में मीटर से छेड़छाड़ की आशंका भी रहती है। इसलिए सभी संदिग्ध मीटरों को बदलकर परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है।
विद्युत निगम के जोन-प्रथम के मुख्य अभियंता पवन अग्रवाल के अनुसार, इलेक्ट्रानिक मीटर की डिस्प्ले बंद होना सामान्य स्थिति नहीं है। यदि मौके पर मीटर नो डिस्प्ले मिलता है तो उसे तत्काल बदलकर सील किया जाता है और जांच के लिए लैब भेजा जाता है।
रिपोर्ट में मानवीय हस्तक्षेप या छेड़छाड़ की पुष्टि होने पर संबंधित उपभोक्ता के खिलाफ विद्युत अधिनियम के तहत एफआइआर दर्ज कराई जाती है। साथ ही वास्तविक बिजली खपत के आधार पर राजस्व का पुनर्निर्धारण कर बकाया वसूला जाता है।
तीन महीने में चोरी के 200 मामले पकड़े
हाल ही में लालकुआं क्षेत्र के एक औद्योगिक कनेक्शन पर भी नो डिस्प्ले मीटर मिला था। मौके पर स्वीकृत आठ किलोवाट के मुकाबले 41 किलोवाट का विद्युत भार संचालित पाया गया। विभाग ने मीटर को सील कर परीक्षण के लिए भेज दिया था।
अधिकारियों का कहना है कि जिले में बिजली चोरी रोकने के लिए लो कंजम्प्शन और संदिग्ध मीटरों की जांच लगातार तेज की जा रही है। पिछले तीन महीनों में 200 कटिया डालकर बिजली चोरी के मामले भी पकड़े गए हैं।

