पीएम मोदी का पहला चीन दौरा: गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में नया अध्याय
31 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन की यात्रा करेंगे। यह दौरा 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन सैनिक संघर्ष के बाद उनका पहला चीन दौरा होगा।
🔴 क्यों है यह दौरा महत्वपूर्ण?
2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में जबरदस्त तनाव आ गया था। अब, पांच साल बाद, पीएम मोदी की यह यात्रा संबंधों में सांकेतिक नरमी और संवाद की बहाली के रूप में देखी जा रही है।
📍 SCO सम्मेलन: टियांजिन में होगी बैठक
स्थान: टियांजिन, चीन
तारीख: 31 अगस्त – 1 सितम्बर 2025
मंच: शंघाई सहयोग संगठन (SCO)
एजेंडा: आतंकवाद, क्षेत्रीय स्थिरता, सीमा विवाद, ऊर्जा व्यापार
🔍 प्रमुख मुद्दे जिन पर हो सकती है चर्चा
1. भारत-चीन सीमा विवाद
गलवान संघर्ष के बाद से दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक वार्ताएं जारी हैं। इस दौरे में सीमा विवाद के समाधान को लेकर नई बातचीत की उम्मीद है।
2. आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई
भारत लगातार SCO मंच पर सीमा पार आतंकवाद पर कड़ा रुख अपनाता रहा है। उम्मीद है कि पीएम मोदी सम्मेलन में इस मुद्दे को खुलकर उठाएंगे।
3. रूस के साथ तेल व्यापार
SCO देशों के बीच रूस से तेल खरीद पर चर्चा हो सकती है, जिसमें भारत की भूमिका अहम होगी।
4. जापान के साथ Indo-Pacific रणनीति
इस दौरे से पहले पीएम मोदी जापान भी जाएंगे, जहां Indo-Pacific क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को लेकर महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना है।
🗣️ कूटनीतिक संदेश
पीएम मोदी की यह यात्रा सिर्फ एक बहुपक्षीय मंच में भागीदारी नहीं, बल्कि एक साफ संदेश है कि भारत अब भी डायलॉग के जरिए तनावों को सुलझाने में विश्वास रखता है। साथ ही यह दौरा भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को भी दर्शाता है।
📌 निष्कर्ष
गलवान संघर्ष के बाद भारत और चीन के बीच सामरिक अविश्वास चरम पर रहा है। लेकिन अब इस दौरे से दोनों देशों के बीच बातचीत का एक नया रास्ता खुल सकता है। SCO जैसे मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी वैश्विक राजनीति में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।

