डिंपल यादव के मस्जिद दौरे पर गरमाई सियासत, मोहिबुल्लाह नदवी ने कर्नल सोफिया कुरैशी का किया जिक्र
नई दिल्ली | 25 जुलाई 2025:
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव के दिल्ली के संसद मार्ग स्थित मस्जिद दौरे को लेकर सियासी हलकों में खलबली मच गई है। भाजपा और दक्षिणपंथी संगठनों ने इसे राजनीतिक एजेंडे के तहत धार्मिक स्थल के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए निशाने पर लिया है। वहीं, रामपुर से सांसद और मस्जिद के इमाम मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने इस पर पलटवार करते हुए बयान जारी किया है और आरोपों को राजनीतिक प्रोपेगेंडा करार दिया।
🔹 मस्जिद दौरे की तस्वीरों पर बवाल
हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों में डिंपल यादव को संसद मार्ग स्थित मस्जिद में बैठक करते हुए देखा गया। भाजपा नेताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मस्जिद का राजनीतिक इस्तेमाल किया गया, जो वक्फ संहिता और धार्मिक परंपराओं के खिलाफ है।
🛡️ मोहिबुल्लाह नदवी का पलटवार
इमाम और सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा:
“सांसद डिंपल यादव को आमंत्रित किया गया था। न कोई भाषण हुआ, न कोई राजनीति। मस्जिद का पवित्रता के साथ इस्तेमाल किया गया और केवल चर्चा हुई।”
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए धार्मिक स्थलों को विवादों में घसीटती है।
🧾 कर्नल सोफिया कुरैशी का जिक्र क्यों?
मौलाना नदवी ने अपने बयान में पहली महिला मुस्लिम कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम लेते हुए कहा:
“जब महिलाएं फौज चला सकती हैं, राष्ट्र की रक्षा कर सकती हैं, तो मस्जिद में बैठना कैसे अपराध हो गया? क्या महिलाओं के लिए मस्जिद में इबादत या चर्चा हराम है?”
उनका यह बयान उन आलोचकों के लिए था जो डिंपल यादव के मस्जिद में बैठने को ‘अनुचित’ बता रहे थे।
⚖️ वक्फ बोर्ड और सरकार की स्थिति
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने इस घटना पर चिंता जताते हुए मस्जिदों के गैर-धार्मिक उपयोग को लेकर दिशा-निर्देश जारी करने की बात कही है। हालांकि, अभी तक कोई कानूनी कार्रवाई या स्पष्ट निर्देश सामने नहीं आया है।
📌 निष्कर्ष
डिंपल यादव का मस्जिद दौरा एक बार फिर राजनीति और धर्म के पेचीदा रिश्ते को सामने लाता है। जहां एक ओर इसे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे धर्मनिरपेक्षता की अभिव्यक्ति बताया जा रहा है। मौलाना नदवी का बयान यह साफ करता है कि मस्जिद सिर्फ इबादत का नहीं, संवाद का भी स्थान है – बशर्ते इरादे पाक हों।

