मेरठ: साधु बनकर लोगों को ठग रहा था ‘कृष्णा बाबा’, असली नाम निकला कासिम, मंदिर में चोरी करते रंगे हाथ पकड़ा गया
📍 मेरठ | 24 जुलाई 2025:
उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के दौराला थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने भक्ति और श्रद्धा को गहरा आघात पहुँचाया है। यहां एक व्यक्ति छह महीने तक साधु का भेष धारण कर ‘कृष्णा बाबा’ के नाम से शिव मंदिर में रह रहा था। लेकिन शिवरात्रि के दिन उसका फर्जी रूप बेनकाब हो गया जब वह मंदिर के दान-पात्र से चोरी करते पकड़ा गया।
🔍 कैसे हुआ खुलासा?
मेरठ के दादरी गांव स्थित एक पुराने शिव मंदिर में यह व्यक्ति बीते छह महीने से रह रहा था। सिर पर जटाएं, माथे पर तिलक, गेरुआ वस्त्र, हाथ में माला और मुख पर साधु जैसा स्वरूप बनाकर वह ग्रामीणों को अपने झांसे में ले रहा था। वह शिव आरती करता, पाठ पढ़ता और श्रद्धालुओं से खुलेआम दान लेता था, जिससे लोगों को उसमें कोई संदेह नहीं हुआ।
लेकिन शिवरात्रि के दिन, जब मंदिर में भंडारा चल रहा था, तब यह तथाकथित ‘कृष्णा बाबा’ दान पेटी के पास जाकर चोरी करने लगा। मंदिर में मौजूद युवकों को शक हुआ और उन्होंने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। तुरंत पुलिस को सूचित किया गया।
🧾 असली नाम है कासिम, बिहार से आया था
पुलिस की पूछताछ में आरोपी की असल पहचान सामने आई। उसका नाम कासिम पुत्र अल्ताफ है और वह बिहार के सीतामढ़ी जिले का रहने वाला है। पूछताछ में उसने बताया कि वह दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास रिक्शा चलाता था, वहीं उसने हिंदू रीति-रिवाज़ और साधु जीवन शैली के बारे में सीखा।
हरिद्वार की यात्रा के दौरान वह मेरठ आया और दादरी गांव के मंदिर में ठहर गया। यहीं उसने ‘कृष्णा बाबा’ बनकर मंदिर पर कब्जा कर लिया और श्रद्धालुओं को धोखा देने लगा।
🚨 पुलिस ने दर्ज की FIR, गहन जांच जारी
एसएसपी विपिन टाडा ने बताया कि आरोपी कासिम के खिलाफ धोखाधड़ी, धार्मिक भावनाओं को आहत करने और चोरी की कोशिश जैसे गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं आरोपी ने इसी तरह की और वारदातें अन्य मंदिरों या स्थानों पर तो नहीं कीं।
📌 निष्कर्ष
यह घटना समाज में फर्जी बाबाओं और ढोंगियों से सतर्क रहने की चेतावनी देती है। यह सिर्फ धार्मिक आस्था से खिलवाड़ नहीं, बल्कि समाज की विश्वास प्रणाली पर हमला है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा धोखा सामने आया है, लेकिन इससे जुड़ी और परतों को उघाड़ना अभी बाकी है।

