बिहार में चुनाव आयोग पर बड़ा आरोप: राहुल गांधी ने कहा—‘पीएम मोदी कर रहे हैं वोट चोरी’
स्थान: बिहार | तारीख: 18 अगस्त 2025
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार के सासाराम में अपनी ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ के दौरान चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के पक्ष में काम कर रहा है, जिससे बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों में वोट चोरी की जा रही है।
राहुल गांधी के आरोपों का विस्तार
SIR प्रक्रिया पर सवाल
राहुल गांधी ने बिहार में चल रही विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया को वोट चोरी का बड़ा कारण बताया। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के तहत 65 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, जबकि महाराष्ट्र में एक करोड़ नए मतदाता जोड़े गए हैं।चुनाव आयोग के अधिकारियों की सुरक्षा पर कानून
राहुल ने 2023 में चुनाव आयोग के अधिकारियों की सुरक्षा बढ़ाने वाले कानून पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि यह कानून आयोग के अधिकारियों को जवाबदेही से बचाने के लिए बनाया गया है ताकि वे सत्ताधारी दल के पक्ष में काम कर सकें।देशव्यापी वोट चोरी का आरोप
राहुल गांधी ने केवल बिहार ही नहीं, पूरे देश में विधानसभा और लोकसभा चुनावों में वोट चोरी होने का आरोप लगाया और इसे लोकतंत्र की हत्या बताया।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों को निराधार और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आयोग की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और सभी राजनीतिक दलों को इसमें भाग लेने का मौका दिया जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आरोप लोकतंत्र के लिए हानिकारक हैं और आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाना गलत है।
विपक्षी एकता और आगामी चुनाव
राहुल गांधी की ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ में राष्ट्रीय जनता दल (RJD), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले)-लिबरेशन (CPI(ML)-Liberation) और अन्य विपक्षी दलों के नेता भी शामिल हैं। लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव भी इस यात्रा में शामिल होकर भाजपा पर लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप लगाते दिखे। यह यात्रा आगामी विधानसभा चुनावों में विपक्षी एकता को दर्शाने का प्रयास है।
निष्कर्ष
राहुल गांधी के आरोप और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया ने बिहार में राजनीतिक माहौल को गरमाया है। विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग इसे पूरी तरह पारदर्शी मानता है। अब देखना यह होगा कि बिहार की जनता इस विवाद को किस नजरिए से देखती है और आगामी चुनावों पर इसका क्या असर पड़ता है।

