रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम की पवित्र ‘रूप छड़ी’ और मुकुट के गायब होने की चर्चा सोशल मीडिया पर तेज होने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया। इस बीच उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने मामले की जांच कराने की बात कही है। वहीं केदारनाथ धाम के रावल भीमाशंकर लिंग ने इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को भ्रामक बताया है।
रावल भीमाशंकर लिंग ने कहा कि केदारनाथ धाम की परंपराएं प्राचीन काल से चली आ रही हैं और इन परंपराओं के अनुसार धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान रावल को रूप छड़ी, मुकुट और अन्य धार्मिक प्रतीक अपने साथ रखने का अधिकार होता है। इसलिए इनके गायब होने की बात पूरी तरह गलत और निराधार है।
उन्होंने बताया कि कपाट बंद होने के बाद शीतकाल में बाबा केदार की पूजा-अर्चना उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में की जाती है और वहीं मुकुट धारण करने की परंपरा निभाई जाती है। इसी परंपरा के तहत धार्मिक आयोजनों में रूप छड़ी और मुकुट का उपयोग किया जाता रहा है।
रावल ने यह भी बताया कि इस वर्ष फरवरी में महाराष्ट्र के नांदेड़ में आयोजित शिव कथा और विश्व शांति यज्ञ कार्यक्रम में वे इन धार्मिक प्रतीकों के साथ शामिल हुए थे। बाद में परंपरा के अनुसार रूप छड़ी की विधिवत साधना कर उसे सुरक्षित स्थान पर जमा कर दिया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर जो बातें कही जा रही हैं कि रूप छड़ी और मुकुट गायब हो गए हैं, वे पूरी तरह भ्रामक हैं और लोगों को ऐसी अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
हालांकि मामले के सामने आने के बाद राज्य सरकार ने भी स्थिति पर नजर रखी है और जरूरत पड़ने पर जांच की बात कही है। वहीं इस घटना के बाद धार्मिक प्रतीकों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
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