
Indo-Pak War : कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवाल और मांगें भारत-पाकिस्तान सीजफायर को लेकर काफी गंभीर हैं, और इनका मूल उद्देश्य सरकार से पारदर्शिता और राजनीतिक संवाद की मांग करना है। कांग्रेस का कहना है कि आखिर सीजफायर एकाएक क्यों करना पड़ा। हालांकि सीजफायर का उद्देश्य सीमा पर बढ़ते तनाव, सैनिक और नागरिक हताहतों को रोकना और शांति प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की कोशिश हो सकता है। हालांकि सरकार ने अभी तक इसकी आधिकारिक वजह विस्तार से नहीं बताई है, लेकिन इसे अमेरिका की मध्यस्थ भूमिका और क्षेत्रीय स्थिरता की जरूरत से जोड़कर देखा जा रहा है।

किसके कहने पर हुआ?
डोनाल्ड ट्रंप ने खुद कहा कि अमेरिका ने इसमें एक मददगार की भूमिका निभाई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तटस्थ मंच की बात कहकर यह संकेत दिया कि अमेरिका ने कुछ कूटनीतिक पहल की है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या भारत ने तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार की है, जबकि अब तक भारत का रुख यही रहा है कि सभी मुद्दे द्विपक्षीय रूप से हल किए जाएंगे (शिमला समझौते के तहत)।
किस आधार पर हुआ?
इस पर कोई स्पष्ट और सार्वजनिक दस्तावेज या वक्तव्य भारत सरकार की तरफ से अब तक नहीं आया है। इसलिए कांग्रेस का सवाल है कि क्या पाकिस्तान से कुछ गारंटी ली गई? आखिर भारत ने क्या शर्तें रखीं? क्या कोई गुप्त बातचीत हुई? क्या यह बातचीत अमेरिका की निगरानी में हुई?
कांग्रेस की मांगें क्या हैं?
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक होनी चाहिए। संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए। जनता को बताया जाए। सीजफायर की पृष्ठभूमि क्या है? पहलगाम हमला और आॅपरेशन सिंदूर से इसका क्या संबंध है? क्या राजनयिक चैनल फिर से शुरू हो गए हैं? अमेरिका को पहले जानकारी कैसे और क्यों मिली? अमेरिका द्वारा तटस्थ मंच का उल्लेख क्या भारत की परंपरागत नीति से विचलन है?
चिंता की मुख्य बातें
क्या सरकार ने शिमला समझौते के सिद्धांत से हटकर कोई नया रास्ता अपनाया है? क्या भारत अब तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार कर रहा है? क्या यह सीजफायर भारत की किसी मजबूरी का परिणाम है? इस तरह कांग्रेस ने अपने सवाल सरकार से पूछे हैं। ताकि जो भी बातचीत या समझौता हुआ है वह देश के सामने आना चाहिए। अगर कोई शिमला समझौते से अलग कोई नया समझौता हुआ है तो उसे देश को बताना चाहिए। Indo-Pak War

