बिहार की सियासत में तकरार: क्यों नहीं बन पा रहे तेजस्वी यादव महागठबंधन के सीएम फेस?
पटना | वेब डेस्क:
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद अब बिहार की राजनीति में अगली जंग विधानसभा चुनाव की है। लेकिन इससे पहले ही महागठबंधन के भीतर घमासान मचा हुआ है। सबसे बड़ा सवाल—क्या तेजस्वी यादव महागठबंधन के सर्वमान्य मुख्यमंत्री पद के चेहरे होंगे? जवाब इतना सीधा नहीं, क्योंकि गठबंधन के कई प्रमुख घटक दल अभी भी इस मुद्दे पर एकमत नहीं हैं।
🔍 सीट बंटवारे से जुड़ी कशमकश
महागठबंधन में सबसे बड़ा रोड़ा सीट बंटवारा है।
RJD, जो पिछले चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी (75 सीटें), वह अधिक सीटों की दावेदार है। वहीं कांग्रेस, जिसने 19 सीटें जीती थीं, इस बार जीत के लिहाज़ से “क्लीन” सीटों की मांग कर रही है।
जब तक ये खींचातानी खत्म नहीं होती, तेजस्वी के नाम की औपचारिक घोषणा भी टलती रहेगी।
🔥 जातीय समीकरण का उलझा गणित
तेजस्वी यादव एक मजबूत यादव-मुस्लिम वोट बैंक के प्रतीक हैं।
लेकिन कांग्रेस और अन्य दलों को डर है कि अगर तेजस्वी को चेहरा घोषित किया गया, तो गैर-Yadav OBC, दलित और सवर्ण वोटरों में विरोध बढ़ सकता है।
इसलिए कई दल चाहते हैं कि कोई एक नेता न चुना जाए, बल्कि सामूहिक नेतृत्व को सामने रखा जाए।
🧭 कांग्रेस की रणनीतिक दूरी
कांग्रेस अब “बराबरी के भागीदार” की भूमिका में है।
तेजस्वी को जल्दबाज़ी में सीएम फेस घोषित करने से कांग्रेस को लगता है कि उसकी भूमिका ‘सहायक दल’ तक सीमित रह जाएगी।
इसलिए कांग्रेस नेतृत्व—खासकर राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे—इस मुद्दे को संभलकर आगे बढ़ा रहे हैं।
🤝 चेहरा नहीं, एकता दिखाने की कोशिश
महागठबंधन अब लोकसभा जैसी रणनीति पर चल रहा है—जहां प्रधानमंत्री पद का कोई चेहरा नहीं घोषित किया गया था।
उसी तर्ज़ पर यह माना जा रहा है कि चुनाव एक साथ लड़ा जाएगा, और अगर बहुमत मिला तो CM का फैसला बाद में होगा। तेजस्वी यादव ने भी इस पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है।
🎯 निष्कर्ष: सीएम फेस की घोषणा रुकी, लेकिन राजनीति जारी
राजद चाहती है कि तेजस्वी को अभी से प्रोजेक्ट किया जाए, ताकि मोमेंटम बना रहे।
कांग्रेस और अन्य घटक दलों का मानना है कि पहले संतुलन और सीटें तय हों, फिर चेहरा तय किया जाए।
यह एक रणनीतिक और जातीय जटिलता से भरी बिसात है, जहाँ हर मोहरा सोच-समझकर चलना पड़ रहा है।

