नई दिल्ली, 24 मई 2025:
भारतीय क्रिकेट टीम के अगले टेस्ट कप्तान को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुभमन गिल इस रेस में सबसे आगे चल रहे हैं और BCCI जल्द ही इंग्लैंड दौरे के लिए टीम इंडिया के साथ नए कप्तान की घोषणा कर सकती है। इसी बीच भारत के पूर्व क्रिकेटर और चर्चित कमेंटेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
सिद्धू ने गंभीर को दी सलाह: “गिल को ज़रूरत से ज़्यादा प्रोटेक्ट न करें”
नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए कहा:
“मैं गिल के खेल का फैन हूं, लेकिन बतौर बल्लेबाज। अगर आप उन्हें कप्तान बना रहे हैं, तो उन्हें ओपनिंग या फिर नंबर 3 पर भेजें। उसके बाद उन्हें ज़रूरत से ज़्यादा ‘प्रोटेक्ट’ करने की आवश्यकता नहीं है।”
सिद्धू ने साफ कहा कि कप्तान बनने के बाद गिल को उनकी जगह (Opening या No.3) पर बल्लेबाज़ी करने दें और फिर उनकी नेतृत्व क्षमता को परखा जाए। उन्होंने आगे कहा:
“अगर आप गिल को टेस्ट कप्तान बना रहे हैं, तो एक साल तक उनमें इन्वेस्ट करें। लेकिन यह नहीं होना चाहिए कि बाद में उन्हें फिर से विराट कोहली की जगह पर खड़ा कर के दोबारा परखा जाए। ऐसा करना गलत होगा।”
कैसी होनी चाहिए टीम इंडिया? सिद्धू की राय:
सिद्धू ने टीम इंडिया के टेस्ट प्लेइंग XI को लेकर भी कुछ अहम सुझाव दिए:
सरफराज खान, जो ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टीम के साथ गए थे, उन्हें मौका मिलना चाहिए।
श्रेयस अय्यर को टीम में शामिल किया जाना चाहिए।
अगर अय्यर को जगह नहीं दी जाती, तो करुण नायर को टीम में लाना चाहिए।
केएल राहुल को नंबर 4 पर बल्लेबाज़ी करानी चाहिए, जहां अब तक विराट कोहली खेलते आए हैं।
सिद्धू का मानना है कि एक मजबूत खिलाड़ी और कप्तान को बार-बार बचाने या बदलने की नीति से बचना चाहिए। टीम में स्पष्टता और निरंतरता आवश्यक है।
कप्तानी की दौड़ में गिल सबसे आगे
विराट कोहली के टेस्ट क्रिकेट से अनिश्चितकालीन ब्रेक और रोहित शर्मा की उम्र को ध्यान में रखते हुए, शुभमन गिल को भविष्य के कप्तान के रूप में देखा जा रहा है। उनकी तकनीकी दक्षता, संयम, और युवा ऊर्जा उन्हें नेतृत्व के लिए एक मजबूत विकल्प बनाते हैं।
निष्कर्ष
शुभमन गिल के नाम पर भले ही मुहर लगनी बाकी हो, लेकिन देश के पूर्व खिलाड़ियों के सुझाव इस बहस को और गहरा कर रहे हैं। नवजोत सिंह सिद्धू की सलाह न सिर्फ गिल की कप्तानी को लेकर स्पष्टता लाती है, बल्कि टीम इंडिया की दिशा और चयन नीति पर भी गंभीर प्रश्न उठाती है।

