दिल्ली पर 50 घंटे भारी! हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए 12,000 क्यूसेक पानी से यमुना खतरे के निशान पर, हाई अलर्ट जारी
📍 नई दिल्ली | 11 अगस्त 2025
✍️ वेब डेस्क
दिल्ली एक बार फिर बाढ़ के खतरे की ओर बढ़ रही है। हरियाणा के यमुनानगर स्थित हथिनीकुंड बैराज से लगातार छोड़े जा रहे 12,000 क्यूसेक पानी के चलते यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली प्रशासन ने अगले 50 घंटों को बेहद संवेदनशील मानते हुए हाई अलर्ट जारी कर दिया है।
🔺 क्या है मौजूदा स्थिति?
हथिनीकुंड बैराज से छोड़े गए पानी का सीधा असर दिल्ली की यमुना नदी पर हो रहा है।
शनिवार रात से अब तक छोड़ा गया पानी धीरे-धीरे दिल्ली पहुंच रहा है, जिससे यमुना का जलस्तर 204.14 मीटर तक पहुंच गया है।
यह चेतावनी स्तर (204.50 मीटर) से केवल कुछ ही सेंटीमीटर दूर है।
यदि पानी का प्रवाह इसी तरह जारी रहा तो यमुना खतरे के निशान (205.33 मीटर) को भी पार कर सकती है।
⏱️ क्यों हैं अगले 50 घंटे अहम?
हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी आमतौर पर 48 से 50 घंटे में दिल्ली की यमुना तक पहुंचता है।
इस कारण 11 से 13 अगस्त तक का समय बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
बारिश और लगातार पानी के डिस्चार्ज के कारण फ्लड प्लेन पर बसे इलाकों में जलभराव और बाढ़ की आशंका बढ़ गई है।
दिल्ली सरकार ने सभी बाढ़ राहत टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
🛠️ प्रशासन की तैयारी क्या है?
यमुना बाजार, मजनूं का टीला, राजघाट, कश्मीरी गेट, कालिंदी कुंज और ओखला जैसे निचले इलाकों में अलर्ट जारी।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24×7 एक्टिव।
NDRF और आपदा राहत टीमें तैयार रखी गई हैं।
लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए रेस्क्यू बोट्स की व्यवस्था।
🧠 विशेषज्ञों की राय
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि:
हथिनीकुंड से पानी का अत्यधिक डिस्चार्ज,
दिल्ली में भारी बारिश,
और यमुना के किनारे बसे अतिक्रमण क्षेत्र —
इन तीनों कारणों से बाढ़ का खतरा लगातार बना हुआ है।
“यमुना के नैचुरल फ्लड प्लेन को यदि संरक्षित नहीं किया गया, तो यह हर साल का संकट बन जाएगा।”
📢 सरकार की अपील
दिल्ली सरकार ने लोगों से अपील की है:
यमुना किनारे जाने से बचें
अफवाहों पर ध्यान न दें
प्रशासन के निर्देशों का पालन करें
ज़रूरत पड़ने पर 1077 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें
🧾 निष्कर्ष
दिल्ली के लिए अगले 50 घंटे बेहद अहम हैं। यमुना का बढ़ता जलस्तर, हथिनीकुंड से छोड़ा गया पानी और स्थानीय बारिश — ये तीनों मिलकर राष्ट्रीय राजधानी को एक बार फिर बाढ़ जैसे हालात में धकेल सकते हैं। प्रशासन सतर्क है, लेकिन नागरिक सहयोग के बिना यह संकट टालना मुश्किल होगा।

