उत्तर प्रदेश में अयोध्या से चित्रकूट तक राम वन गमन मार्ग के निर्माण में गड़बड़ी और बरसात में सड़क क्षतिग्रस्त होने के मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ के नाराजगी जताने के बाद अब सरकार ने सख्त रुख अख्तियार कर लियाा है। इस मामले में सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। शनिवार को शासन ने प्रयागराज में तैनात अधिशासी अभियंता रवींद्र पाल सिंह को सस्पेंड कर दिया और अधीक्षण अभियंता (SE) के खिलाफ नियम 7 के तहत विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए। निर्माण संस्था के खिलाफ कार्रवाई के लिए नोटिस जारी की गई। वहीं एक अन्य मामले में यूपी में प्रतिनियुक्ति पर तैनात रहे पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर पवन वर्मा की भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
राम वन गमन मार्ग की सड़कें क्षतिग्रस्त होने की शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाराजगी जताई थी। ग्रीनफील्ड राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 731ए राम वन गमन मार्ग पैकेज दो के निरीक्षण के दौरान तमाम खामियां मिली थी। सड़क पर कई जगह दरार आ गई थी तथा ढलान भी क्षतिग्रस्त पाए गए थे। हाईवे के किमी 35 से 49.15 (औतारपुर से सिंगरौर उपरहार) के बीच करीब 1.5 किमी के हिस्से में पेवमेंट में कुछ स्थानों पर किनारे की पटरी में दरारें और करीब 500 मीटर लंबाई में हाईवे के किनारे सुरक्षात्मक कार्य क्षतिग्रस्त पाए गए थे। जांच टीम के निरीक्षण में इसकी पुष्टि हुई थी। इसके लिए शासन ने अधीक्षण अभियंता (एसई) तथा अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) को परियोजना के पर्यवेक्षणीय दायित्वों के निर्वहन न करने के लिए जिम्मेदार ठहराया।
शासन ने अधिशासी अभियंता रवींद्र पाल सिंह को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए हैं। शनिवार को विशेष सचिव दिव्य प्रकाश गिरि की ओर से निलंबन आदेश जारी किया गया। रवींद्र पाल सिंह को निलंबन के दौरान प्रमुख अभियंता (विकास) एवं विभागाध्यक्ष लोक निर्माण विभाग कार्यालय से संबद्ध किया गया है। इसी के साथ अधीक्षण अभियंता ओंकार भारतीय को पर्यवेक्षण न करने का जिम्मेदार ठहराया गया। अधीक्षण अभियंता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। साथ ही मुख्य अभियंता वाराणसी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
चीफ इंजीनियर पवन वर्मा की मुश्किलें बढ़ीं, विभागीय जांच के आदेश
यूपीडा में प्रतिनियुक्ति पर तैनात रहे लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता पवन वर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक दिन पहले शासन ने उनकी प्रतिनियुक्ति रद्द कर प्रमुख अभियंता (विभागाध्क्ष) कार्यालय से संबद्ध कर दिया था। शनिवार को एक अन्य मामले में इनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई।
पवन वर्मा यूपीडा से पहले भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण में मुख्य अभियंता (यातायात) पद पर तैनात थे। उनकी प्रतिनियुक्ति कार्यकाल के दौरान बेयर बोट चार्टरिंग अनुबंध के क्रियान्वयन में वित्तीय अनियमितता सामने आई थी। इसके अलावा बेयर बोट चार्टरिंग से संबंधित फर्म ने विभाग को एक पोस्ट डेटेड चेक जारी किया था। यह चेक बाउंस हो गया था। आरोप है कि चेक बाउंस होने के बावजूद समय से आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। शासन ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए उत्तर प्रदेश सरकारी लोक नियामवली के नियम-7 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई। इसके तहत पवन वर्मा को आरोप पत्र दिया जाएगा और उन्हें जवाब देना होगा।

