लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर अपने भतीजे आकाश आनंद को बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्हें पार्टी का नेशनल कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया है। इस निर्णय के बाद पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। मायावती ने उन्हें पूरे देश में युवाओं को बसपा से जोड़ने की जिम्मेदारी दी है।
आकाश आनंद पहले भी युवाओं के बीच लोकप्रिय रहे हैं और अब उनकी सक्रियता का असर आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिल सकता है।
बसपा की अहम बैठक में लिया गया फैसला
रविवार को लखनऊ में हुई बसपा की अहम बैठक में आकाश आनंद को लेकर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। इसके बाद वह एक बार फिर पार्टी में नंबर दो की पोजिशन पर आ गए हैं। मायावती ने उन्हें बिहार चुनाव की कमान सौंपी है, जो उनके लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा मानी जा रही है। आकाश आनंद सिर्फ प्रचार ही नहीं करेंगे, बल्कि चुनावी रणनीति बनाने में भी अहम भूमिका निभाएंगे।
बिहार में क्या है बसपा की स्थिति?
बिहार में बसपा का 25-30 सीटों पर कैडर मजबूत माना जाता है, हालांकि पार्टी यहां कभी बड़ी राजनीतिक ताकत के रूप में नहीं उभर सकी। 2020 के विधानसभा चुनाव में बसपा को एक सीट पर जीत मिली थी। इस बार पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि बसपा जैसी पार्टी के लिए अकेले चुनाव लड़ना आसान नहीं होगा।
युवाओं को जोड़ने की मुहिम शुरू
आकाश आनंद अब देशभर में युवाओं को बसपा से जोड़ने की मुहिम चलाएंगे। साथ ही दलित उत्पीड़न के मामलों के खिलाफ आवाज भी बुलंद करेंगे। सूत्रों के अनुसार मायावती ने उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे पार्टी के संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करें और वोट बैंक को एकजुट बनाए रखें, ताकि विरोधी दल उसमें सेंध न लगा सकें।
बसपा की स्थिति और भविष्य की रणनीति
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में बसपा की स्थिति कमजोर हुई है। भाजपा, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आज़ाद समाज पार्टी ने उसके परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाई है। अब बसपा एक बार फिर खुद को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। आकाश आनंद की सक्रिय वापसी से पार्टी में नया जोश देखा जा रहा है। पार्टी के अंदर भी उनकी अच्छी-खासी लोकप्रियता है।

