उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण में एक अहम प्रशासनिक निर्णय लेते हुए बड़े स्तर पर बदलाव किया है। 2011 बैच के आईएएस अधिकारी कृष्णा करुणेश को नोएडा प्राधिकरण का नया मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे थे और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर व्यापक चर्चा हो रही थी।
सीईओ पद पर बदलाव की पृष्ठभूमि
शनिवार को शासन द्वारा जारी आदेश में वर्तमान सीईओ डॉ. लोकेश एम का तबादला कर दिया गया। उनकी जगह कृष्णा करुणेश को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। डॉ. लोकेश एम का स्थानांतरण उस समय हुआ है, जब नोएडा प्राधिकरण भ्रष्टाचार, लापरवाही और प्रशासनिक शिथिलता के आरोपों से घिरा हुआ था। ऐसे में सरकार का यह कदम व्यवस्था में सुधार की दिशा में अहम माना जा रहा है।
इंजीनियर युवराज मेहता मामला: बदलाव की मुख्य वजह
नोएडा प्राधिकरण में हुए इस प्रशासनिक फेरबदल के पीछे सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की संदिग्ध मौत को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। इस घटना ने पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। मृतक के परिजनों के साथ-साथ आम नागरिकों ने भी प्राधिकरण की लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाई थी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं संज्ञान लिया और विशेष जांच दल (SIT) के गठन के आदेश दिए। माना जा रहा है कि जांच की प्रक्रिया और बढ़ते जनदबाव के चलते शीर्ष स्तर पर यह प्रशासनिक बदलाव किया गया।
कृष्णा करुणेश: नए नोएडा सीईओ का परिचय
नोएडा के नए सीईओ कृष्णा करुणेश 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने एमए और एलएलबी जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यताएं प्राप्त की हैं। प्रशासनिक और कानूनी मामलों की गहरी समझ के कारण उन्हें एक सख्त, अनुशासित और निर्णय लेने में सक्षम अधिकारी के रूप में जाना जाता है।
उनकी छवि एक ऐसे अफसर की रही है, जो नियम-कानून के दायरे में रहकर कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटते। यही वजह है कि उन्हें नोएडा जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्राधिकरण की कमान सौंपी गई है।
प्रशासनिक अनुभव: गोरखपुर से नोएडा तक का सफर
कृष्णा करुणेश का प्रशासनिक करियर विविध और प्रभावशाली रहा है। नोएडा में सीईओ बनने से पहले वे इसी प्राधिकरण में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) के पद पर कार्यरत थे, जिससे उन्हें नोएडा की प्रशासनिक संरचना और चुनौतियों की गहरी जानकारी है।
इसके अलावा वे गोरखपुर में जिलाधिकारी (DM) के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जहां उन्होंने कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने गाजियाबाद में एसडीएम और सीडीओ के रूप में कार्य किया है, जबकि हापुड़ और बलरामपुर जिलों में भी जिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभाली है। कुशीनगर में वे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के पद पर भी तैनात रह चुके हैं।
नोएडा के सामने चुनौतियां और नई उम्मीदें
नए सीईओ के रूप में कृष्णा करुणेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती नोएडा प्राधिकरण की छवि को सुधारना है। इंजीनियर की मौत के बाद आम जनता का जो भरोसा सिस्टम से डगमगाया है, उसे फिर से बहाल करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होगी।
इसके साथ ही लंबित परियोजनाओं को गति देना, बिल्डर-बायर विवादों का समाधान, शहर की साफ-सफाई, बुनियादी ढांचे का विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना भी उनके एजेंडे में शामिल होगा। चूंकि वे पहले ही नोएडा में एसीईओ रह चुके हैं, इसलिए उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे बिना समय गंवाए ठोस फैसले लेकर विकास कार्यों को नई दिशा देंगे।

