ED का शिकंजा: सौरभ भारद्वाज के आवास सहित 13 ठिकानों पर छापे, अस्पताल निर्माण में भ्रष्टाचार की जांच तेज़
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और दिल्ली सरकार में पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। अस्पताल निर्माण से जुड़े धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले में ईडी ने दिल्ली और एनसीआर के 13 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इन स्थानों में भारद्वाज का घर भी शामिल है।
क्या है पूरा मामला?
ED द्वारा की जा रही यह जांच दिल्ली सरकार की अस्पताल निर्माण परियोजनाओं में हुई कथित गड़बड़ियों से जुड़ी है। आरोप हैं कि प्रोजेक्ट्स की लागत जानबूझकर बढ़ाई गई, काम को बिना वजह टालते हुए, कई ठेके मनमाने तरीके से दिए गए, और सरकारी फंड्स का गलत इस्तेमाल किया गया।
ईडी को शक है कि कुछ निजी कंपनियों को फर्ज़ी भुगतान करके धन को श्वेत से काला बनाया गया। इस मामले में सौरभ भारद्वाज के अलावा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का नाम भी सामने आया है।
राजनीति में उबाल: आरोप-प्रत्यारोप का दौर
AAP ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दावा किया कि यह रेड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर उठे विवाद से ध्यान भटकाने की साज़िश है।
AAP नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।
वहीं, बीजेपी ने इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि दिल्ली की जनता के साथ जो धोखा हुआ है, अब वह सामने आ रहा है। पार्टी के प्रवक्ताओं ने AAP पर “दोनों हाथों से लूटने” का आरोप लगाया।
छापेमारी की पूरी तस्वीर
ED की टीमों ने एक साथ कई स्थानों पर कार्रवाई की:
सौरभ भारद्वाज का आवास
उनसे जुड़े ठेकेदारों और अफसरों के ठिकाने
संभावित लेन-देन से संबंधित कार्यालय और बैंक डिटेल्स
छापेमारी के दौरान एजेंसी को महत्वपूर्ण दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और बैंक ट्रांजैक्शन्स से जुड़े रिकॉर्ड मिले हैं, जिन्हें अब जांच में शामिल किया जाएगा।
AAP नेताओं पर जांच का दबाव
सौरभ भारद्वाज पहले भी केंद्र सरकार के खिलाफ तीखे बयान देते रहे हैं। ऐसे में AAP का आरोप है कि राजनीतिक सक्रियता की सजा दी जा रही है।
इससे पहले पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं जैसे सत्येंद्र जैन, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह पर भी ED और CBI की जांच चल रही है। इस नए घटनाक्रम ने दिल्ली की राजनीति में फिर से हलचल पैदा कर दी है।
निष्कर्ष: जांच या राजनीतिक दबाव?
सौरभ भारद्वाज और अन्य ठिकानों पर ED की यह छापेमारी सिर्फ एक जांच नहीं, बल्कि राजनीति और कानून के टकराव की नई कहानी बन गई है।
जहां एक ओर एजेंसियां इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रही हैं, वहीं विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला मान रहा है।
अस्पताल निर्माण घोटाले से जुड़े कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं। लेकिन इस कार्रवाई ने यह बहस फिर से जिंदा कर दी है — क्या जांच एजेंसियां स्वतंत्र हैं या सत्ता के इशारों पर चल रही हैं?

