रोजगार महाकुंभ 2025: सीएम योगी का बड़ा संदेश – अब नौकरी के लिए नहीं छोड़ना पड़ेगा गांव
उत्तर प्रदेश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक और अहम कदम उठाया है। रोजगार महाकुंभ 2025 की शुरुआत करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अब राज्य के युवाओं को रोजगार की तलाश में पलायन नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि अब उन्हें अपने ही जिले में सम्मानजनक नौकरी के अवसर मिल रहे हैं।
सरकारी नियुक्तियों में रिकॉर्ड: 7 साल में 7 लाख नौकरियाँ
मुख्यमंत्री योगी ने आंकड़ों के ज़रिए अपनी सरकार की उपलब्धियां सामने रखीं। उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े सात वर्षों में उत्तर प्रदेश में करीब 7 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियाँ दी गई हैं।
उन्होंने कहा, “अब प्रदेश का युवा अपनी योग्यता के अनुसार स्थानीय स्तर पर ही अवसर प्राप्त कर रहा है। यही नया उत्तर प्रदेश है, जो आत्मनिर्भरता की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।”
रोजगार महाकुंभ 2025 का लक्ष्य – 50 हज़ार युवाओं को नौकरी
इस महाअभियान के तहत सरकार का उद्देश्य है कि कम से कम 50,000 युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाए। खास बात यह है कि इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर की नौकरियों के लिए भी मार्गदर्शन और सहायता दी जा रही है।
चयनित युवाओं को पासपोर्ट बनाने, वीज़ा प्रक्रिया, इंटरव्यू ट्रेनिंग और तकनीकी सहयोग जैसी सुविधाएं मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएंगी।
केवल नौकरी नहीं, कौशल भी मिलेगा
सरकार सिर्फ नौकरियाँ देने तक सीमित नहीं रहना चाहती। इस योजना के तहत युवाओं को पहले स्किल डेवलपमेंट यानी कौशल विकास प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे बदलते नौकरी बाजार की ज़रूरतों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें।
योगी सरकार इस बात का खास ध्यान रख रही है कि प्रशिक्षण से लेकर नियुक्ति तक की प्रक्रिया पारदर्शी, तेज़ और प्रभावी हो।
पलायन से परिवर्तन तक: बदलता उत्तर प्रदेश
सीएम योगी ने याद दिलाया कि कुछ साल पहले तक गांवों के गांव रोजगार की तलाश में बाहर जाते थे, लेकिन अब तस्वीर बदल गई है।
उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने यह दिखाया है कि अगर नीति साफ हो और नीयत सही हो, तो कोई भी राज्य युवाओं को पलायन नहीं, अवसर दे सकता है।”
निष्कर्ष: रोजगार के केंद्र में उत्तर प्रदेश
रोजगार महाकुंभ 2025 सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक सोच है—जिसका मकसद है कि हर युवा को उसके घर के पास, जिले के भीतर रोजगार मिले।
यह पहल उत्तर प्रदेश को सिर्फ आर्थिक रूप से नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी सशक्त बनाएगी।
जहाँ कभी नौकरी के लिए दिल्ली, मुंबई या पंजाब की ओर देखा जाता था, अब वही युवा कह रहे हैं—“रोजगार के लिए अब यहीं बेहतर भविष्य है।”

