एफआईआर में एनएमडीसी , एल एंड टी प्रबंधन और ठेकेदारों पर लापरवाही का स्पष्ट आरोप, फिर भी न किसी अधिकारी पर कार्रवाई, न ठेकेदार गिरफ्तार – शासन-प्रशासन आखिर किसे और क्यों बचा रहा है?
किरंदुल। एनएमडीसी किरंदुल स्क्रीनिंग प्लांट-III में 4 मजदूरों की जान लेने वाले दर्दनाक पहाड़ी धसक हादसे को 2 साल 7 महीने 26 दिन बीत चुके हैं, लेकिन आज तक न तो मजिस्ट्रियल जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है और न ही दोषी एनएमडीसी अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों पर कोई कानूनी कार्रवाई हुई है। पीड़ित परिवार आज भी न्याय की बांट जोह रहा हैं।

27 फरवरी 2024 को क्या हुआ था?
थाना किरंदुल में दर्ज एफआईआर एफआईआर नम्बर 0017 दिनांक 28/02/2024 के अनुसार, 27 फरवरी 2024 को दोपहर 2.30 बजे स्क्रीनिंग प्लांट-III में रिटेनिंग वाल निर्माण के दौरान ऊपर की पहाड़ी अचानक धसक गई। एल एंड टी के पेटी ठेकेदार बकुल बाला के अधीन काम कर रहे 4 मजदूर – *बिट्टू बाला, निर्मल बाला, संतोष कुमार और तुषार बाला* मलबे में दबकर मर गए। प्राथी दिलीप बैरागी ने एफआईआर में साफ लिखा है कि –
“बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, बिना कार्य योजना व संभावित घटना-दुर्घटना का आंकलन किए लापरवाही से कार्य कराया जा रहा था। पहाड़ी धसकने का आभास होने पर रॉक ब्रेकर बंद करने को कहा, फिर भी काम नहीं रोका गया।”
एफआईआर के बाद सब ठंडे बस्ते में
इस मामले में पुलिस ने धारा 337, 304-A, 34 IPC के तहत एनएमडीसी प्रबंधन, एलएंडटी प्रबंधन, ठेकेदार बकुल बाला और ठेकेदार हरिशंकर के खिलाफ अपराध दर्ज किया था, लेकिन 31 महीने बाद भी –
1. अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बचेली द्वारा कराई गई जाँच रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई।
2. किसी भी एनएमडीसी अधिकारी/कर्मचारी को आरोपी नहीं बनाया गया।
3. ना ही एल एंड टी प्रबंधन पर कोई ठोस कार्रवाई हुई, ना ठेकेदारों पर।
4. पीड़ित परिजनों को मिले मुआवजे का भी कोई स्पष्ट लेखा-जोखा नहीं।
बड़ा सवाल – किसे बचाया जा रहा है?
स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों का आरोप है कि एनएमडीसी जैसी महारत्न कंपनी और बड़ी निर्माण कंपनी एल एंड टी के नाम आते ही पूरा प्रशासनिक अमला बैकफुट पर आ जाता है। यदि यही हादसा किसी छोटी कंपनी में हुआ होता तो अब तक कार्यवाही हो चुका होता।
अब सवाल यही है कि जब एफआईआर में ही लापरवाही सिद्ध है, मजदूरों की मौत हुई है, तो शासन-प्रशासन की इस चुप्पी के पीछे कौन है? क्या गरीब बंगाली मजदूरों की जान की कीमत सस्ती है?
पीड़ित परिवारों ने मांग की है कि अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बचेली की जाँच रिपोर्ट तुरंत सार्वजनिक की जाए और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों-ठेकेदारों पर हत्या का मामला दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

