छत्तीसगढ़ में धूमधाम से मनाया गया हरियाली और परंपरा का त्योहार, दुल्हन की तरह सजा मुख्यमंत्री निवास
रायपुर, 24 जुलाई 2025:
छत्तीसगढ़ आज पारंपरिक उल्लास और सांस्कृतिक समर्पण के साथ हरेली तिहार मना रहा है। यह त्योहार खेती-बाड़ी, हरियाली, और प्रकृति के प्रति आभार का प्रतीक है। सावन मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व इस बार और भी विशेष बन गया, जब मुख्यमंत्री निवास को दुल्हन की तरह सजाया गया।
🌿 क्या है हरेली तिहार?
‘हरेली’ शब्द का अर्थ है हरियाली। यह पर्व मुख्यतः ग्रामीण और कृषक जीवन से जुड़ा हुआ है, जहां लोग अपने कृषि यंत्रों, पशुधन, और पेड़ों की पूजा करते हैं। यह त्योहार परंपरा, पर्यावरण और लोक संस्कृति को एक साथ जोड़ता है।
🏠 दुल्हन बना मुख्यमंत्री निवास
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निवास को ग्रामीण परिवेश के अनुरूप नीम की डालियों, तोरण, मिट्टी के दीयों, और पारंपरिक कलाकृतियों से सजाया गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कोई ग्रामीण उत्सव गाँव से सीधे राजधानी में उतर आया हो।
🌱 सीएम की अपील: “हर घर एक पौधा लगाएं”
मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों को पर्व की शुभकामनाएँ दीं और कहा:
“हरेली तिहार प्रकृति और संस्कृति के संगम का प्रतीक है। यह हमें पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी याद दिलाता है। मैं सभी से निवेदन करता हूँ कि हर घर में कम से कम एक पौधा लगाएं।”
🎭 लोक संस्कृति की झलक: गीत, नृत्य और परंपराएं
त्योहार के मौके पर राउत नाचा, गेड़ी नृत्य, गिल्ली-डंडा, भंवरा, जैसे पारंपरिक खेल और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हुईं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इन गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
🐂 कृषि उपकरणों और पशुधन की पूजा
परंपरागत रूप से हरेली में लोग अपने हल, बैलगाड़ी, ट्रैक्टर, और गाय-भैंस की पूजा करते हैं। राजधानी रायपुर सहित राज्य के हर कोने में यह परंपरा आज भी जीवित है।
📷 मुख्य आकर्षण की झलक:
🌸 सीएम हाउस को ग्रामीण मेले की तरह सजाया गया
🎋 हर घर में नीम और ताजे पौधों की टहनियों से सजावट
🎉 स्थानीय कलाकारों ने प्रस्तुत किए लोकगीत और नृत्य
🪔 पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ गांव जैसा माहौल
📸 फोटो स्पॉट और बच्चों के लिए पारंपरिक खेलों की व्यवस्था
🔚 निष्कर्ष
हरेली तिहार 2025 ने यह सिद्ध कर दिया कि छत्तीसगढ़ आज भी अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है। यह पर्व न सिर्फ कृषि संस्कृति का उत्सव है, बल्कि सामाजिक एकता, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक भी बन गया है।

