अलीगढ़, उत्तर प्रदेश: कोतवाली अलीगढ़ के भोजपुरी क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां राजीना नाम की महिला बीते दो महीनों से लापता है। राजीना के पिता, मोहम्मद उमर, अपनी बेटी की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन पुलिस अब तक कोई ठोस कार्रवाई करने में नाकाम रही है।
राजीना की शादी अलीगढ़ निवासी दानिश नामक युवक से हुई थी। लापता होने के बाद से ससुराल पक्ष की ओर से विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं—कभी कहा जाता है कि वह किसी के साथ भाग गई, तो कभी यह दावा किया जाता है कि उसे मारकर दफना दिया गया है।
मोहम्मद उमर, जो अब वृद्ध हो चुके हैं, थाने के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाया है कि वे मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उमर का कहना है कि उन्हें आशंका है कि उनकी बेटी की हत्या कर दी गई है।
इस पूरे मामले में सबसे अधिक प्रभावित दो छोटे मासूम बच्चे हैं, जो अब मां की ममता से वंचित होकर इधर-उधर भटक रहे हैं। सवाल यह है कि इन बच्चों की जिम्मेदारीकौन उठाएगा? क्या उनका भविष्य यूं ही अंधकार में चला जाएगा?
मोहम्मद उमर की पीड़ा यह भी है कि उनकी बेटी की कोई सुध लेने वाला नहीं है—न प्रशासन, न समाज। वह बार-बार यही सवाल उठा रहे हैं कि क्या एक आम इंसान की कोई सुनवाई नहीं है?
हम टैक्स इसीलिए देते हैं ताकि प्रशासन और पुलिस जनता की सुरक्षा करें, न कि शिकायतों को अनदेखा करें। लेकिन आज स्थिति यह हो गई है कि पुलिस का काम जांच करने से ज़्यादा सोशल मीडिया पर रील बनाना, घूस लेना और आम जनता को परेशान करना बन गया है।
सवाल कई हैं, लेकिन जवाब एक भी नहीं:
आखिर राजीना कहां है?
क्या वह सच में घर छोड़कर चली गई या उसके साथ कोई अनहोनी हुई है?
इन मासूम बच्चों का भविष्य कौन संभालेगा?
और मोहम्मद उमर जैसे पिता कब तक न्याय की आस में भटकते रहेंगे?
फिलहाल, मोहम्मद उमर न्याय की गुहार लेकर लगातार थाने के चक्कर लगा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि उनकी बेटी की गुमशुदगी की जांच गंभीरता से की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

