उत्तराखंड सरकार का ऐतिहासिक फैसला: अब स्कूलों के नाम होंगे बलिदानियों के नाम पर
📍 देहरादून | 25 जुलाई 2025
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने एक प्रेरणादायक पहल के तहत प्रदेश के चार शासकीय विद्यालयों का नाम बदलकर उन्हें बलिदानियों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के नाम पर समर्पित किया है। यह निर्णय न केवल शहीदों की शौर्यगाथा को सहेजने का प्रयास है, बल्कि प्रदेश के युवाओं को उनके जीवन मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
✅ बदले गए विद्यालयों की सूची
मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी अधिसूचना के अनुसार निम्नलिखित विद्यालयों के नामों में परिवर्तन किया गया है:
| 🔢 | ज़िला | पूर्व नाम | नया नाम (सम्मानित व्यक्ति) |
|---|---|---|---|
| 1 | पौड़ी गढ़वाल | राजकीय इंटर कॉलेज, चिपलघाट | शहीद भगत सिंह रावत राजकीय इंटर कॉलेज, चिपलघाट |
| 2 | देहरादून | राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मैंद्रथ | पं. सैराम राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मैंद्रथ |
| 3 | पौड़ी गढ़वाल | राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पुण्डेरगांव | स्व. कुंवर सिंह रावत राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पुण्डेरगांव |
| 4 | पिथौरागढ़ | राजकीय इंटर कॉलेज, डीडीहाट | स्व. माधों सिंह जंगपांगी राजकीय इंटर कॉलेज, डीडीहाट |
🎯 सरकार का उद्देश्य
मुख्यमंत्री धामी का यह फैसला उत्तराखंड की उस गौरवशाली परंपरा को पुनः जीवित करता है जिसमें शहीदों का सम्मान सर्वोपरि माना जाता है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि:
“यह केवल नामकरण नहीं, बल्कि बलिदान की भावना को विद्यालयों की नींव में शामिल करने का संकल्प है।”
सरकार का मानना है कि इस प्रकार के बदलाव छात्रों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और प्रेरणा के बीज बोने का कार्य करते हैं। हर स्कूल एक आदर्श व्यक्तित्व के नाम से जुड़ा हो, यह नीति आने वाले वर्षों में और विद्यालयों में लागू की जा सकती है।
🏞️ स्थानीय गौरव की पहचान
नए नामों में स्थानीय वीरों और स्वतंत्रता सेनानियों को वरीयता दी गई है। इससे हर विद्यालय, अपने क्षेत्र के ऐतिहासिक नायकों की पहचान बनेगा। उदाहरण स्वरूप, पौड़ी गढ़वाल के शहीद भगत सिंह रावत को अब उनके क्षेत्र के विद्यालय में स्मृति रूप में संजोया गया है।
🔮 आगे की दिशा
शिक्षा विभाग अन्य जिलों के विद्यालयों की सूची तैयार कर रहा है जहाँ इस नीति को आगे बढ़ाया जा सकता है।
भविष्य में विद्यालय के पुस्तकालय, प्रयोगशाला और भवनों को भी प्रेरणास्पद नामों से सजाने की योजना पर विचार हो रहा है।
📢 निष्कर्ष
यह पहल न केवल उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में सांस्कृतिक जुड़ाव को सशक्त करेगी, बल्कि नई पीढ़ी को यह सिखाएगी कि “देश के लिए जो बलिदान देता है, वह सदा अमर होता है।”

