तेजस्वी यादव का बड़ा ऐलान: बिहार चुनाव के बहिष्कार पर विचार, SIR प्रक्रिया को बताया ‘धांधली’
📍 पटना | 24 जुलाई 2025
बिहार की राजनीति में उस वक्त बड़ा हलचल मच गया जब नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने संभावित रूप से बिहार विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करने की बात कही। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा चल रही विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (Special Intensive Revision – SIR) में भारी अनियमितता हो रही है, जिससे विपक्ष को चुनाव में निष्पक्ष मौका नहीं मिल पाएगा।
तेजस्वी यादव ने क्यों दी बहिष्कार की चेतावनी?
तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर SIR प्रक्रिया इसी तरह “एकतरफा” तरीके से चलती रही और लाखों मतदाताओं के नाम सूची से बिना सूचना के काटे जाते रहे, तो महागठबंधन के दलों के साथ मिलकर चुनाव बहिष्कार पर विचार किया जाएगा।
“जब वोटर लिस्ट से लाखों नाम कट चुके हैं और सारी प्रक्रिया बीजेपी के इशारे पर चल रही है, तो फिर चुनाव कराने का क्या मतलब?”
उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पूरा तंत्र सत्ता पक्ष के नियंत्रण में काम कर रहा है।
भाजपा और जदयू का पलटवार
तेजस्वी के इस बयान पर भाजपा और जदयू ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
भाजपा नेता दिलीप जायसवाल ने इसे “लोकतंत्र का अपमान” बताया और कहा कि तेजस्वी यादव हार के डर से भागने की कोशिश कर रहे हैं।
जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने तो यहां तक कह दिया कि तेजस्वी यादव अब फर्जीवाड़ा और लंपटगिरी की राजनीति का पर्याय बन चुके हैं।
क्या है SIR (Special Intensive Revision)?
SIR प्रक्रिया चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए शुरू की जाती है, जिसमें डुप्लीकेट, मृत और ट्रांसफर किए गए मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। यह प्रक्रिया इस वर्ष 28 जून से शुरू होकर 30 सितंबर 2025 तक चलेगी।
तेजस्वी यादव का आरोप है कि इस प्रक्रिया में जानबूझकर विपक्ष समर्थक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं।
निष्कर्ष
तेजस्वी यादव का यह बयान बिहार की राजनीति में एक नया भूचाल ला सकता है। चुनाव आयोग, विपक्षी दल, और सत्ता पक्ष तीनों अब इस बहस के केंद्र में हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वास्तव में महागठबंधन चुनावों का बहिष्कार करता है, या यह महज़ राजनीतिक दबाव की रणनीति है।

