मेरठ। मध्य-पूर्व में जारी ईरान-इजराइल युद्ध का असर अब भारत के उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर मेरठ में तेल और गैस संकट के कारण हजारों उद्योग प्रभावित हो रहे हैं।
उद्योग संगठनों के अनुसार जिले के लगभग 50 हजार उद्योग इस संकट से किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए हैं। कच्चे माल और गैस की आपूर्ति में बाधा आने के कारण 8 हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयों ने अपना उत्पादन कम कर दिया है, जबकि करीब 50 इकाइयां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं।
उद्योगपतियों का कहना है कि युद्ध के कारण पेट्रोकेमिकल उत्पादों और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। खासतौर पर प्लास्टिक चिप्स, पेट्रोकेमिकल उत्पाद और रबर प्रोसेसिंग ऑयल की कमी के कारण कई फैक्ट्रियों का संचालन प्रभावित हो रहा है।
इसके साथ ही कच्चे माल की कीमतों में भी भारी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जानकारी के अनुसार प्लास्टिक दाने की कीमत लगभग 105 रुपये से बढ़कर 225 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जबकि रबर की कीमत भी 105 रुपये से बढ़कर करीब 185 रुपये प्रति किलो हो गई है।
गैस की बढ़ती कीमतों का असर होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसाय पर भी पड़ा है। बताया जा रहा है कि कॉमर्शियल गैस सिलेंडर, जो पहले करीब 1200 रुपये में उपलब्ध था, अब 1800 से 2000 रुपये तक में ब्लैक में बिक रहा है।
हालांकि प्रशासन का कहना है कि घरेलू एलपीजी गैस की आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है और तेल कंपनियों के पास उपभोक्ताओं की जरूरत के अनुसार पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य-पूर्व में जारी युद्ध लंबे समय तक चलता है तो इसका असर देश के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों और बाजारों पर भी पड़ सकता है।

