बिहार की सियासत में चुनाव से पहले गर्मी, राहुल और तेजस्वी का BJP व चुनाव आयोग पर हमला
पटना, अगस्त 2025 — बिहार में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, राज्य की राजनीति में हलचल तेज़ होती जा रही है। इसी कड़ी में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव ने संयुक्त मंच से केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि गरीब, पिछड़े और दलित तबकों के लाखों मतदाताओं के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।
यह बयान उन्होंने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान दिया, जिसका मकसद नागरिकों को उनके मताधिकार के प्रति जागरूक करना बताया गया।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चुनाव आयोग के ज़रिए लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा,
“एक दिन सच्चाई सबके सामने आएगी कि चुनाव आयोग को राजनीतिक हथियार बना दिया गया है। लेकिन मैं, तेजस्वी यादव और बिहार की जनता इस डर के आगे झुकेगी नहीं।”
उन्होंने SIR यानी सिलेक्टिव इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का हवाला देते हुए दावा किया कि इसके तहत लाखों मतदाताओं के नाम बिना सूचना के सूची से हटा दिए गए।
तेजस्वी यादव का समर्थन और सवाल
राजद नेता तेजस्वी यादव ने राहुल गांधी का समर्थन करते हुए कहा कि यदि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं रहा, तो लोकतंत्र की आत्मा ही खतरे में पड़ जाएगी।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया,
“आज अगर मतदाता सूची से नाम हटाना एक प्रक्रिया बन गई है, तो सोचिए महिलाओं, दलितों और गरीबों की आवाज़ कैसे उठेगी? बिहार लोकतंत्र की जननी है, इसे बाज़ार की चीज़ नहीं बनने देंगे।”
चुनाव आयोग की सफाई
विपक्ष के इन आरोपों पर चुनाव आयोग ने स्पष्टीकरण दिया है। आयोग के अनुसार, जिन 22 लाख नामों को हटाया गया है, वे या तो मृतक, स्थानांतरित या दोहराए गए नाम थे।
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी नागरिक पुनः आवेदन करके अपने नाम को सूची में जुड़वा सकता है।
भाजपा का पलटवार
भाजपा ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की इस मुहिम को राजनीतिक नाटक करार दिया है। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि विपक्ष का मकसद केवल जनता को गुमराह करना है।
भाजपा के मुताबिक, चुनाव आयोग की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी रूप से प्रमाणित है।
SIR प्रक्रिया क्या है?
सिलेक्टिव इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन (SIR) एक विशेष प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची को समय-समय पर अपडेट किया जाता है। इसमें आधार और अन्य पहचान पत्रों के माध्यम से नामों का मिलान कर दोहराव और ग़लत प्रविष्टियों को हटाया जाता है।
विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक और सामाजिक पूर्वाग्रहों के आधार पर किया जा रहा है।
निष्कर्ष
बिहार की राजनीति में यह मुद्दा धीरे-धीरे बड़ा रूप ले रहा है। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव जहां इसे लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई बता रहे हैं, वहीं भाजपा इसे विपक्ष की निराशा और हताशा का परिणाम मान रही है।
आगामी चुनावों में यह विवाद किस दिशा में जाएगा, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन इतना साफ है कि “वोट” अब केवल अधिकार नहीं, एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

