उत्तराखंड में नया नियम: ₹5000 से अधिक की खरीद पर अफसर को देनी होगी पूर्व सूचना
देहरादून | 16 जुलाई 2025
उत्तराखंड सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए एक नया प्रशासनिक आदेश जारी किया है। अब राज्य सरकार के कर्मचारी अगर ₹5000 या एक माह के वेतन (जो भी कम हो) से अधिक कीमत की कोई वस्तु या संपत्ति खरीदते हैं, तो उन्हें इसकी पूर्व जानकारी संबंधित अधिकारी को देनी होगी। यह आदेश सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने के उद्देश्य से जारी किया गया है।
🧾 क्या है नया नियम?
सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार:
यदि कोई सरकारी कर्मचारी ₹5000 या अपने मासिक वेतन (जो भी कम हो) से अधिक मूल्य की वस्तु खरीदता है, तो उसे संबंधित विभागाध्यक्ष, सचिव या जिलाधिकारी को पहले सूचना देनी होगी।
इस नियम में टीवी, फ्रिज, एसी, स्मार्टफोन, फर्नीचर, वाहन आदि जैसी चल संपत्तियां और जमीन, मकान जैसी अचल संपत्तियां शामिल हैं।
कर्मचारी को संपत्ति खरीदने के बाद स्रोत की जानकारी भी देना अनिवार्य है।
🧭 उद्देश्य क्या है?
इस नियम का उद्देश्य है:
भ्रष्टाचार पर नियंत्रण: संदिग्ध खरीद और संपत्ति छुपाने की प्रवृत्ति पर लगाम।
वित्तीय पारदर्शिता: सेवा अवधि में अर्जित संपत्तियों की निगरानी।
नैतिक प्रशासन: सरकारी सेवकों के व्यवहार में अनुशासन और जिम्मेदारी।
📌 किसे मानना होगा ये नियम?
यह नियम सभी स्तरों के सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा—चाहे वे शिक्षक हों, क्लर्क, इंजीनियर, अधिकारी या पुलिसकर्मी।
यह IAS और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होगा।
📅 संपत्ति विवरण देने की समयसीमा
सभी सरकारी कर्मचारियों को नियुक्ति के समय और हर 5 वर्ष में एक बार अपनी चल और अचल संपत्तियों का विवरण जमा कराना होगा।
संबंधित अधिकारी जब चाहे, संपत्ति का स्पष्टीकरण या दस्तावेज मांग सकते हैं।
नियम का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
🔍 निष्कर्ष
उत्तराखंड सरकार का यह कदम सरकारी सेवा में पारदर्शिता, ईमानदारी और सार्वजनिक विश्वास को बनाए रखने की दिशा में एक अहम पहल है। जहां एक ओर यह नियम कर्मचारियों पर जिम्मेदारी बढ़ाता है, वहीं यह शासन में जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास भी है।

